Tuesday, April 21, 2026

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प्रिंस का फाइनेंशियल मैनेजर था सैफी:शूटरों का मैनेजमेंट करता था,पुलिस की पूछताछ में गैंगस्टर प्रिंस के रंगदारी सिंडिकेट के आर्थिक ढांचे का खुलासा


खास गुर्गे को आज कोलकाता से धनबाद लाए जाने की उम्मीद
कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट पर पकड़ा गया गैंगस्टर प्रिंस खान का खास गुर्गा सैयद सैफ अब्बास नकवी उर्फ ‘मेजर’ उर्फ सैफी को सोमवार को धनबाद नहीं लाया जा सका। इसकी मुख्य वजह पश्चिम बंगाल के कोर्ट में तकनीकी प्रक्रिया के अलावा सेंट्रल एजेंसी व बंगाल पुलिस की पूछताछ रही। धनबाद के पुलिस अधिकारी रविवार से ही टीम के साथ कोलकाता में कैंप किए हुए हैं। अब मंगलवार को सैफी को बंगाल से ट्रांजिट रिमांड पर धनबाद लाए जाने की उम्मीद है। वहीं धनबाद पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सैफी ने कई राज उगले हैं। इनमें रंगदारी सिंडिकेट के पूरे आर्थिक ढांचे का खुलासा हुआ है। उसने बताया कि वह न केवल वारदातों की प्लानिंग करता था, बल्कि प्रिंस के लिए शूटरों का मैनेजमेंट, हथियारों की लाइजनिंग और चीफ फाइनेंशियल मैनेजर के रूप में भी काम करता था। बता दें कि विगत रविवार को पश्चिम बंगाल के दमदम एयरपोर्ट से सैफी को गिरफ्तार किया गया था। वह दुबई से फ्लाइट से पहुंचा था। धनबाद पुलिस की विशेष टीम को उसके भारत लौटने की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम दमदम एयरपोर्ट पर ही मौजूद थी। शूटरों को दी जाने वाली सुपारी सैफी तय करता था पुलिस की पूछताछ में सैफी ने स्वीकार किया कि ठेकेदार व व्यापारियों से वसूली गई रंगदारी के एक-एक पैसे का हिसाब उसके पास रहता था। किस गुर्गे को उसके काम के बदले कितनी रकम देनी है, शूटरों को कितनी सुपारी पहुंचानी है, यह भी वही तय करता था। उसने व्यवसायियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने, पर्चा वायरल करने वाले लोकल नेटवर्क और रंगदारी देने वालों का भी खुलासा किया है। पूछताछ में कई नाम सामने आए हैं। प्रिंस तक रकम भेजने के सीक्रेट रूट का खुलासा… दहशत फैलाने का हाइब्रिड मॉडल: सैफी रंगदारी वसूली में डिजिटल और स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल करता था। व्यवसायियों को सीधे वर्चुअल नंबर से कॉल कर वह प्रिंस खान के नाम का खौफ बनाता था। हथियारों की सप्लाई और डिलीवरी: वह प्रिंस खान गिरोह के लिए बैकबोन था। वारदात के लिए हथियार कहां से आएंगे, सप्लाई कौन करेगा और किस अपराधी को कौन सा हथियार देना है, सब सैफी ही तय करता था। फाइनेंशियल मास्टरमाइंड: वसूली के पैसों का बंटवारा उसकी निगरानी में होता था। वह गिरोह के हर गुर्गे का हिस्सा उसके परफॉर्मेंस के आधार पर तय करता था। रंगदारी वसूली और फंड ट्रांसफर: सैफी के कबूलनामे का सबसे बड़ा हिस्सा फंड ट्रांसफर से जुड़ा है। उसने पुलिस को बताया है कि रंगदारी से वसूली गई रकम को दुबई में बैठे प्रिंस खान तक सुरक्षित पहुंचाने का रूट और जरिया भी वही तय करता था।

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