Wednesday, April 22, 2026

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पृथ्वी दिवस पर धरती को बचा रहे जिले के ‘ग्रीन हीरो’ को सलाम

पृथ्वी दिवस पर धरती को बचा रहे जिले के ‘ग्रीन हीरो’ को सलाम

गांवों में चली मुहिम. हजारों पेड़ों को बचाकर ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण की पेश की मिसाल

jamshedpur,

पूरे देश और दुनिया में जहां जंगलों और पृथ्वी को बचाने के लिए बड़े-बड़े अभियान चल रहे हैं. वहीं पूर्वी सिंहभूम जिले के कई ग्रामीण वर्षों से चुपचाप लेकिन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. वन विभाग के साथ मिलकर ये लोग सच्चे “जंगल हीरो” बन चुके हैं. छोटे-छोटे लेकिन निरंतर और मेहनत भरे प्रयासों से वे जंगलों को बचाने में बड़ा बदलाव ला रहे हैं. यही वजह है कि आज वन विभाग भी उन्हें सलाम करता है और उनके बिना कोई कदम उठाना मुश्किल हो जाता है.

गुड़ाबांधा का जंगल रक्षक : 25 साल की जंग में 12 हजार पेड़ों को नयी जिंदगी देने वाले जगपति सिंह

एक समय था जब गुड़ाबांधा का नाम सुनते ही लोग सिहर उठते थे. वजह थी जंगलों में नक्सलियों की सक्रियता. उनका आना-जाना आम बात थी. लेकिन आज यह इलाका नक्सलमुक्त हो चुका है और हालात पूरी तरह बदल गये हैं. इन बदलते हालात के बीच एक नाम लगातार लोगों की जुबान पर रहा. वह हैं जगपति सिंह. करीब 60 वर्षीय जगपति सिंह पिछले 25 वर्षों से जंगलों की रक्षा में जुटे हैं. वे लोगों को जागरूक करते हैं. जलावन के लिए लकड़ी काटने वालों को समझाते हैं और जंगलों की कटाई रोकने के लिए अपने साथियों के साथ घर-घर जाकर संवाद करते हैं. उनकी इसी सतत मुहिम का परिणाम है कि अब तक वे 12 हजार से अधिक पेड़ों को बचाने में सफल रहे हैं. मुसाबनी रेंज में सक्रिय रहते हुए उन्होंने खासकर गुड़ाबांधा क्षेत्र में ग्राम वन प्रबंधन एवं संरक्षण समिति के जरिये जंगलों को जीवंत बनाये रखा है.

आग से जंग, हरियाली की जीत: महिलाओं की ताकत से जंगलों को बचा रही सुनीता महतो

गर्मियों में जंगलों को सबसे ज्यादा नुकसान आग से होता है. जब वन विभाग के प्रयास कम पड़ जाते हैं, तब स्थानीय लोग ही सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आते हैं. घाटशिला रेंज के काशपानी उपपरिसर के आमचुड़िया गांव की सुनीता महतो इसका सशक्त उदाहरण हैं. वर्ष 2011 से वे इस अभियान से जुड़ी हैं और महिलाओं को संगठित कर जंगलों को आग से बचाने का काम कर रही हैं. उन्होंने कई एकड़ जंगल को आग से बचाया है. पारंपरिक तरीकों से पहले आग को फैलने से रोकती हैं, फिर वन विभाग के सहयोग से उसे नियंत्रित करती हैं. महुआ चुनने या बीड़ी के कारण लगने वाली आग को रोकने के लिए वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक करती हैं. उनके प्रयासों का ही असर है कि घाटशिला रेंज में आग लगने की घटनाओं में कमी आयी है.

तस्करों पर वार, जंगल से प्यार: सुखचंद बास्के का मिशन ‘हर पेड़ सुरक्षित’

चाकुलिया क्षेत्र बांस और घने जंगलों के लिए जाना जाता है. लेकिन यहां लंबे समय से वन तस्करी एक बड़ी समस्या रही है. सीमित संसाधनों के कारण वन विभाग के लिए इसे रोकना चुनौतीपूर्ण था. ऐसे में चंदवा गांव के 35 वर्षीय सुखचंद बास्के ने आगे आकर वन सुरक्षा समिति का गठन किया. इसके माध्यम से उन्होंने वन तस्करी के खिलाफ अभियान शुरू किया. उन्होंने न सिर्फ वन उत्पादों की चोरी रोकी, बल्कि पेड़ों की कटाई पर भी लगाम लगायी. अब तक वे 4 से 5 हजार पेड़ों को बचा चुके हैं. साथ ही, वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं और स्थानीय समुदाय को जंगल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इन सभी प्रयासों से यह स्पष्ट है कि जब स्थानीय लोग ठान लेते हैं, तो वे किसी भी बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं. पूर्वी सिंहभूम के ये “जंगल हीरो” न सिर्फ अपने क्षेत्र, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं.

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