![]()
पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड स्थित बड़ा तेलोपाड़ा गांव में भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। यहां लगभग 370 ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह गांव प्रखंड मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर है। गांव के अधिकांश कुएं और चापानल सूख चुके हैं। अपनी प्यास बुझाने के लिए ग्रामीणों को लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित एक झरने से पानी लाना पड़ता है। यह समस्या विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में बसे आदिवासी और पहाड़िया समुदाय के लोगों को प्रभावित कर रही है। गांव तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं दूषित पानी के सेवन से ग्रामीण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि गांव तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है। लगभग साढ़े तीन किलोमीटर का रास्ता कच्चा होने के कारण बीमार पड़ने पर मरीजों को खटिया के सहारे पैदल चलकर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनके गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल पेयजल और सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा: बीडीओ इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, जिसके कारण परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से पेयजल संकट दूर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है और जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।


