
Hazaribagh Treasury Ghotala, हजारीबाग (विवेक चंद्रा की रिपोर्ट): हजारीबाग जिले में वेतन मद में की गई फर्जी निकासी के मामले की जांच अब एक नई कानूनी और प्रशासनिक उलझन में फंसती नजर आ रही है. जांच की जिम्मेदारी सीआइडी के एडीजी मनोज कौशिक को दिए जाने के बाद उनकी पूर्व की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. दरअसल, मनोज कौशिक वर्ष 2012 से 2014 के बीच हजारीबाग के एसपी के रूप में पदस्थापित रहे थे और जांच का दायरा भी इसी समयावधि को छूता है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि जिस अवधि की जांच हो रही है, उस दौरान जिले की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की कमान संभालने वाले अधिकारी ही अब इस मामले की जांच कैसे कर सकते हैं.
डॉ. अमिताभ कौशल समिति ने मांगी 22 बिंदुओं पर रिपोर्ट
इधर, बोकारो और हजारीबाग में हुए इस बड़े वेतन घोटाले की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी है. समिति के अध्यक्ष डॉ. अमिताभ कौशल ने हजारीबाग के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजकर 22 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. इसमें वर्ष 2011 से लेकर 2026 तक की लंबी अवधि के दौरान हुए भुगतान से जुड़े सभी अभिलेख शामिल हैं.
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दस्तावेजों की गहन समीक्षा के बाद होगा जिलों का दौरा
उच्च स्तरीय समिति ने विशेष रूप से बजटीय प्रावधान, आवंटन आदेश, भुगतान से जुड़े वाउचर और पूर्व की जांच रिपोर्ट समेत कई महत्वपूर्ण कागजात मांगे हैं. समिति यह देखना चाहती है कि फर्जी निकासी के लिए किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई. दस्तावेज मिलने और उनकी प्रारंभिक समीक्षा के बाद समिति के सदस्यों द्वारा संबंधित जिलों का दौरा करने की भी योजना है, ताकि जमीनी हकीकत का पता लगाया जा सके.
क्या है ‘हितों का टकराव’ का मामला?
चर्चा है कि चूंकि डॉ. अमिताभ कौशल की समिति 2011 से 2026 तक के रिकॉर्ड खंगाल रही है, इसमें मनोज कौशिक के एसपी रहते हुए हुए भुगतान भी जांच के दायरे में आएंगे. ऐसे में सीआईडी की जांच और सरकारी समिति की जांच के बीच तालमेल और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना लाजिमी है. अब देखना यह है कि क्या राज्य सरकार जांच अधिकारी को लेकर कोई नया निर्णय लेती है या इसी ढांचे के तहत जांच आगे बढ़ेगी.
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