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| हजारीबाग हजारीबाग में लगातार हो रही बिजली कटौती से आम जनता ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्री सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि उद्यमियों को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है। डेमोटांड़ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां 24 घंटे में 15 से 20 बार तक बिजली कट रही है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। उद्योग निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर पा रहे हैं, जिससे बैंक लोन चुकाने में भी उद्यमियों को परेशानी हो रही है। लगातार घाटे की स्थिति ने कई उद्यमियों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। वैश्विक परिस्थितियों का असर भी स्थानीय उद्योगों पर साफ दिख रहा है। ईरान से इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव के कारण डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मजबूरन डीजल ब्लैक में लेना पड़ रहा है। जो बहुत महंगा पड़ रहा है । इसके चलते उद्यमियों को हर महीने एक लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, इंडस्ट्री में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और मुनाफा घट गया है। डीजल के सहारे उत्पादन करने के बावजूद तय लक्ष्य हासिल नहीं हो पा रहा है। नए उद्योग नहीं लग रहे, रोजगार पर असर डेमोटांड़ इंडस्ट्रियल एरिया में तीन दर्जन से अधिक उद्योग संचालित हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए नए उद्यमी यहां निवेश करने से बच रहे हैं। इसका असर सीधे रोजगार पर पड़ रहा है। नए उद्योग नहीं लगने से रोजगार के अवसर भी नहीं बढ़ रहे हैं। उद्यमियों की पीड़ा सालाना करोड़ों का नुकसान झारखंड स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल के अनुसार, बार-बार बिजली कटौती के कारण एक-एक उद्योग को साल में 40 से 60 लाख का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि डीजल पर भारी खर्च के बावजूद उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं हो पा रहा है। उद्यमियों का कहना है कि अगर जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो हजारीबाग का इंडस्ट्री सेक्टर पूरी तरह से ठप हो सकता है। कुल मिलाकर, बिजली संकट, डीजल की किल्लत और महंगे कच्चे माल ने हजारीबाग के उद्योगों को चौतरफा मार के बीच खड़ा कर दिया है।

