Wednesday, April 29, 2026

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बोकारो में होमगार्ड जवान के खाते से 1 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन, CID ने किया गिरफ्तार


बोकारो ट्रेजरी से अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने सोमवार को पहली गिरफ्तारी की। एसपी कार्यालय बोकारो के अकाउंट सेक्शन में प्रतिनियुक्त गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) के जवान सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। वह पहले से गिरफ्तार मुख्य आरोपी अकांउटेंट कौशल कुमार पांडेय का सहयोगी बताया जा रहा है। एसआईटी जांच में सतीश के खाते में करीब 1.06 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई है। इसके बाद टीम ने उसके खाते में मौजूद 43 लाख रुपए फ्रीज करा दिए। आरोपी को सीआईडी की विशेष अदालत, रांची में पेश करने के बाद होटवार जेल भेज दिया गया। अब सीआईडी उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। बोकारो पुलिस ने शुरुआत में इस मामले को सामान्य धोखाधड़ी मानते हुए बीएनएस की धारा 316(2), 316(5), 318(2) और 61(2) लगाई थी। लेकिन सीआईडी ने जांच अपने हाथ में लेते ही केस को गंभीर आर्थिक और साइबर अपराध मानते हुए धाराओं में बड़ा बदलाव किया। अब बीएनएस की धारा 316(2), 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) के साथ आईटी एक्ट की धारा 66 आरडब्ल्यू, 43(डी), 43(जी), 43(एच), 43(आई), 43(जे) और 66(डी) जोड़ी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन धाराओं के जुड़ने से आरोपियों के खिलाफ केस मजबूत होगा और जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है। ये हुए गिरफ्तार देवनारायण मुर्मू : सिपाही, वर्तमान तैनाती गोइलकेरा थाना अरुण कुमार मार्डी : आरोपी का जीजा, कोवाली, पूर्वी सिंहभूम सरकार हेंब्रम : आरोपी का साला, कोवाली, पूर्वी सिंहभूम गोराचांद मार्डी: आरोपी का दोस्त, मयूरभंज, ओडिशा इधर, चाईबासा में सिपाही ने रिश्तेदार-दोस्तों के खातों में भेजे 26.22 लाख; मुफस्सिल थाने में एफआईआर दर्ज, 4 गिरफ्तार चाईबासा में पुलिस विभाग के खातों से लाखों रुपए की अवैध निकासी करने के मामले में सिपाही देवनारायण मुर्मू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। देवनारायण मुर्मू गोइलकेरा थाने में तैनात है। इस मामले में चाईबासा ट्रेजरी अफसर सुमित कुमार सिंह ने मुफस्सिल थाने में सिपाही और उसके रिश्तेदारों/दोस्तों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। -शेष पेज 11 पर कंप्यूटर डेटा से छेड़छाड़ कर निजी बैंक खातों को जोड़ा, 9 वर्ष तक करता रहा अवैध निकासी देवनारायण मुर्मू ने एसपी ऑफिस के लेखा विभाग में कार्यरत रहने के दौरान कंप्यूटर डेटा से छेड़छाड़ की। सरकारी राशि को अवैध रूप से अपने, रिश्तेदारों व दोस्त के खातों में ट्रांसफर किया। उसने अपने वेतन खाते के अलावा एक अतिरिक्त बैंक खाता भी पुलिस विभाग के डेटा में अपलोड कर रखा था। इस अकाउंट में भी सरकारी राशि भेजी की जाती थी। वह करीब नौ साल तक दूसरे कर्मचारियों के वेतन की राशि निकालता रहा। धोखाधड़ी की सामान्य धारा हटाकर गंभीर धारा लगाई…बीएस सिटी पुलिस ने पहले बीएनएस की धारा 318(2) लगाई थी, जो सामान्य धोखाधड़ी से संबंधित है और इसमें अधिकतम तीन साल की सजा है। सीआईडी ने इसे बदलकर धारा 318(4) लगाई है, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। यह धारा तब लगाई जाती है, जब धोखाधड़ी के जरिए बड़ी संपत्ति एक व्यक्ति से दूसरे को हस्तांतरित की जाती है। सरकारी रिकॉर्ड में जालसाजी की धाराएं भी जोड़ी गईं…सीआईडी ने बीएनएस की धारा 338 और 340(2) भी जोड़ी है। धारा 338 सरकारी रिकॉर्ड या वैल्यूएबल सिक्योरिटी में जालसाजी से संबंधित है, जबकि धारा 340(2) जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने पर लगती है। एजेंसी का मानना है कि आरोपियों ने सरकारी पोर्टल पर फर्जी डेटा अपलोड कर उसे असली दिखाते हुए निकासी की। वहीं धारा 336(3) सरकारी पद के दुरुपयोग से संबंधित है। आईटी एक्ट से डिजिटल फर्जीवाड़े की जांच मजबूत होगी…सीआईडी ने आईटी एक्ट की धाराएं जोड़कर संकेत दिया है कि मामला केवल फर्जी दस्तावेजों का नहीं, बल्कि डिजिटल सिस्टम से छेड़छाड़ का भी है। जांच एजेंसी अब फॉरेंसिक रिपोर्ट के जरिए यह पता लगाएगी कि क्या आरोपियों ने किसी अधिकारी के पासवर्ड, ओटीपी या डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया था। धारा 43(डी) और 43(जी) सरकारी कंप्यूटर या नेटवर्क में अनधिकृत प्रवेश से संबंधित हैं। हजारीबाग में अवैध निकासी मामले में अब तक 5 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें लेखा शाखा में पदस्थापित सिपाही शंभु कुमार, उसकी प|ी काजल कुमारी, आरक्षी धीरेंद्र सिंह, आरक्षी रजनीश सिंह उर्फ पंकज सिंह और उसकी प|ी खुशबू सिंह शामिल हैं। पूछताछ में शंभु कुमार ने खुलासा किया कि वह बाल आरक्षियों के अस्थायी खातों का इस्तेमाल कर फर्जी निकासी करता था। बहाली के बाद जब तक उनका जीपीएफ/सीपीएफ नंबर आवंटित नहीं होता था, तब तक वेतन भुगतान के लिए अस्थायी खाता बनाया जाता था। वह कर्मियों के नाम पर अपने परिचितों के बैंक खाते जोड़ देता था। एसआईटी को करीब एक दर्जन और लोगों के नाम मिले हैं, जिनके खातों में रकम ट्रांसफर हुई। जल्द उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। हजारीबाग केस में बाल आरक्षियों के खातों से फर्जीवाड़े का खुलासा

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