झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में सरकार ने युवक के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। सरकार की ओर से कहा गया कि जेल अधीक्षक के सेवानिवृत्त होने के कारण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दस्तावेज पेश करने में बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने 5 मई तक हर हाल में रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर जेल आईजी व गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। मामले में पलामू सीजेएम कोर्ट ने संबंधित युवक के खिलाफ दर्ज केस का मूल रिकॉर्ड पेश किया। याचिका में आरोप है कि 1 मार्च 2025 को महफूज अहमद को पुलिस ने हिरासत में लेकर मारपीट की थी। हाईकोर्ट ने जेलों में चिकित्सकों की कमी का मामला चीफ जस्टिस के पास भेजा झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को राज्य की जेलों में चिकित्सकों की कमी पर संज्ञान से दर्ज मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए इस मामले को चीफ जस्टिस के कोर्ट में भेज दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि राज्य की जेलों में चिकित्सक के 43 स्वीकृत पद हैं, लेकिन उन स्वीकृत पदों में से मात्र 1 पद पर ही चिकित्सक कार्यरत है। शेष 42 पद खाली हैं। जेलों में मेडिकल सुविधाओं के आधारभूत संरचना में भी कमी है। इससे संबंधित क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान प्रार्थी ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर अपनी किडनी खराब होने का हवाला देते हुए जमानत देने का आग्रह किया था। बताया गया कि जब तक जवाब आता, तब तक प्रार्थी की मौत हो गई। प्रार्थी की मौत हो जाने पर उनके स्वजनों ने मुआवजा देने का आग्रह भी किया था। इस पर कोर्ट ने उन्हें मुआवजे के संबंध में याचिका दाखिल करने की छूट प्रदान की है। लेकिन, इस दौरान यह मुद्दा उठाया गया कि राज्य की जेलों में चिकित्सकों की भारी कमी है।
दो महत्वपूर्ण मामलों में दिए गए अहम आदेश:हिरासत में मौत मामले पर गृह सचिव व जेल आईजी को पेश होना होगा: हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में सरकार ने युवक के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। सरकार की ओर से कहा गया कि जेल अधीक्षक के सेवानिवृत्त होने के कारण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दस्तावेज पेश करने में बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने 5 मई तक हर हाल में रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर जेल आईजी व गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। मामले में पलामू सीजेएम कोर्ट ने संबंधित युवक के खिलाफ दर्ज केस का मूल रिकॉर्ड पेश किया। याचिका में आरोप है कि 1 मार्च 2025 को महफूज अहमद को पुलिस ने हिरासत में लेकर मारपीट की थी। हाईकोर्ट ने जेलों में चिकित्सकों की कमी का मामला चीफ जस्टिस के पास भेजा झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को राज्य की जेलों में चिकित्सकों की कमी पर संज्ञान से दर्ज मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए इस मामले को चीफ जस्टिस के कोर्ट में भेज दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि राज्य की जेलों में चिकित्सक के 43 स्वीकृत पद हैं, लेकिन उन स्वीकृत पदों में से मात्र 1 पद पर ही चिकित्सक कार्यरत है। शेष 42 पद खाली हैं। जेलों में मेडिकल सुविधाओं के आधारभूत संरचना में भी कमी है। इससे संबंधित क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान प्रार्थी ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर अपनी किडनी खराब होने का हवाला देते हुए जमानत देने का आग्रह किया था। बताया गया कि जब तक जवाब आता, तब तक प्रार्थी की मौत हो गई। प्रार्थी की मौत हो जाने पर उनके स्वजनों ने मुआवजा देने का आग्रह भी किया था। इस पर कोर्ट ने उन्हें मुआवजे के संबंध में याचिका दाखिल करने की छूट प्रदान की है। लेकिन, इस दौरान यह मुद्दा उठाया गया कि राज्य की जेलों में चिकित्सकों की भारी कमी है।


