शेखपुरा के सिविल सर्जन सभागार में सोमवार को फेरिक कार्बॉक्सी माल्टोज़ (FCM) के उपयोग पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं का प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना और मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है। यह महत्वपूर्ण पहल स्वास्थ्य मंत्री द्वारा 26 मार्च को शुरू की गई थी। इसके तहत राज्य भर में गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के उपचार के लिए FCM का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। चिकित्सा पदाधिकारी और स्टाफ नर्सों ने सक्रिय रूप से भाग लिया कार्यक्रम में सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी और स्टाफ नर्सों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार सिंह ने FCM के उपयोग, इसके लाभ और प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार, डॉ. सोनू कुमार और पिरामल स्वास्थ्य, शेखपुरा की टीम भी मौजूद रही। कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं प्रशिक्षण में बताया गया कि बिहार में लगभग 52% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जो मातृ स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। FCM एक प्रभावी और सुरक्षित उपचार पद्धति है, जिससे एक ही खुराक में लगभग 2 g/dl तक हीमोग्लोबिन में वृद्धि संभव है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं और इसे देने में मात्र 15-20 मिनट का समय लगता है। जिले के सभी प्रखंडों में FCM की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। यह पहल ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम के तहत मातृ स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे मातृ मृत्यु दर को कम करने में सहायता मिलेगी।
शेखपुरा में FCM यूज पर ट्रेनिंग प्रोग्राम:प्रेग्नेंट महिलाओं के इफेक्टिव ट्रीटमेंट, मैटरनल डेथ रेट घटाने पर फोकस
शेखपुरा के सिविल सर्जन सभागार में सोमवार को फेरिक कार्बॉक्सी माल्टोज़ (FCM) के उपयोग पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं का प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना और मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है। यह महत्वपूर्ण पहल स्वास्थ्य मंत्री द्वारा 26 मार्च को शुरू की गई थी। इसके तहत राज्य भर में गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के उपचार के लिए FCM का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। चिकित्सा पदाधिकारी और स्टाफ नर्सों ने सक्रिय रूप से भाग लिया कार्यक्रम में सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी और स्टाफ नर्सों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार सिंह ने FCM के उपयोग, इसके लाभ और प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार, डॉ. सोनू कुमार और पिरामल स्वास्थ्य, शेखपुरा की टीम भी मौजूद रही। कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं प्रशिक्षण में बताया गया कि बिहार में लगभग 52% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जो मातृ स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। FCM एक प्रभावी और सुरक्षित उपचार पद्धति है, जिससे एक ही खुराक में लगभग 2 g/dl तक हीमोग्लोबिन में वृद्धि संभव है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं और इसे देने में मात्र 15-20 मिनट का समय लगता है। जिले के सभी प्रखंडों में FCM की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। यह पहल ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम के तहत मातृ स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे मातृ मृत्यु दर को कम करने में सहायता मिलेगी।


