भास्कर न्यूज|गुमला राज्य के सरकारी महकमों में वेतन मद में ट्रेजरी से हुई अवैध निकासी और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार के निर्देश पर अब जिले के सरकारी दफ्तरों में फेरबदल होने जा रहा है। निर्देश के तहत एक ही कार्यालय में तीन साल से अधिक समय से जमे लेखा कर्मियों का तबादला अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही अब संविदा या मानदेय पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर वित्तीय लेन-देन के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे। कई जिलों में ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले सामने आने के बाद ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मुख्य सचिव ने उपायुक्त दिलेश्वर महतो को पत्र भेजकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि वरीय लेखा सहायक, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल और विपत्र लिपिक जो एक ही स्थान पर तीन वर्ष की अवधि पूरी कर चुके हैं। उन्हें अविलंब स्थानांतरित किया जाए। वहीं कार्यालयों में मैनपावर की कमी के कारण संविदा और एक मुश्त मानदेय पर काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय जिम्मेदारी दे दी जाती है। ऐसे में अब इन ऑपरेटरों को भी वित्तीय कार्यों से पूरी तरह दूर रखने का निर्देश दिया गया है। अब वे केवल डेटा एंट्री और तकनीकी कार्यों तक सीमित रहेंगे ताकि जवाबदेही तय की जा सके। इधर डीसी के निर्देश पर जिले के सभी विभागों में समीक्षा कर ऐसे कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है, जो स्थानांतरण के दायरे में आते हैं। प्रशासन 30 मई तक इसकी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट राज्य वित्त विभाग को प्रेषित करेगा। इस समय सीमा के भीतर सभी जरूरी फेरबदल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में कई कार्यालयों में सालों से एक ही कुर्सी पर जमे लेखा कर्मियों के बीच अपनी नई पोस्टिंग को लेकर सुगबुगाहट और हड़कंप तेज है। वहीं उन ऑपरेटरों के लिए भी यह बड़ा झटका है।

