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बिहार की राजनीति में डॉ. श्वेता गुप्ता का नाम इन दिनों चर्चा में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में उनके शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इसे एनडीए द्वारा महिला मतदाताओं, वैश्य समाज और मिथिलांचल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। शिवहर विधानसभा सीट बिहार की 243 सीटों में से एक महत्वपूर्ण सीट है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता दल (यू) ने लंबे समय से सक्रिय नेता सरफुद्दीन की जगह डॉ. श्वेता गुप्ता को टिकट देकर चौंका दिया था। शुरुआती दौर में विरोध का किया सामना चुनाव के शुरुआती दौर में उन्हें “बाहरी उम्मीदवार” कहकर विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि वह मूल रूप से सीतामढ़ी क्षेत्र से आती हैं। हालांकि, उन्होंने अपने जनसंपर्क, सौम्य व्यवहार और सामाजिक सक्रियता के दम पर धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीत लिया। चुनाव मैदान में उनके सामने राष्ट्रीय जनता दल के नवनीत कुमार झा थे, जो दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ झा के पोते और पूर्व विधायक अजीत झा के बेटे हैं। राजनीतिक विरासत के बावजूद, डॉ. श्वेता गुप्ता ने नवनीत झा को 31,398 वोटों से हराकर भारी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही वह आजादी के बाद शिवहर की पहली महिला विधायक बनकर इतिहास रच चुकी हैं।
डॉक्टर के रूप में भी जिले में पहचान राजनीति में आने से पहले डॉ. श्वेता गुप्ता चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। उन्होंने सीतामढ़ी और शिवहर इलाके में एक सफल चिकित्सक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके पति डॉ. वरुण कुमार भी क्षेत्र के चर्चित चिकित्सकों में शामिल हैं और अस्पताल, स्कूल तथा अन्य व्यवसायों का संचालन करते हैं। उच्च शिक्षित पृष्ठभूमि, सौम्य छवि और साफ-सुथरे राजनीतिक जीवन के कारण डॉ. श्वेता गुप्ता को नई पीढ़ी के प्रभावशाली चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उनके खिलाफ एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जो बिहार की राजनीति में उन्हें अलग पहचान देता है।
जनसंख्या के लिहाज से छोटा जिला है शिवहर
शिवहर जिले का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। बिहार की मुख्यधारा की राजनीति से अलग यहां की जनता लगभग हर चुनाव में अपना विधायक बदलने के लिए जानी जाती है। जिले में केवल एक ही विधानसभा सीट है, शिवहर। यहीं वजह है कि यहां हर चुनाव में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं।
तिरहुत संभाग के उत्तरी हिस्से में स्थित शिवहर जिला उत्तर और पूर्व में सीतामढ़ी, दक्षिण में मुजफ्फरपुर तथा पश्चिम में पूर्वी चंपारण से घिरा हुआ है। जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों के लिहाज से यह बिहार का सबसे छोटा जिला माना जाता है। जिले में शिवहर, पिपराही, पुरनहिया, डुमरी कटसारी और तरियानी समेत कुल पांच प्रखंड हैं। 6 अक्टूबर 1994 को बना था स्वतंत्र जिला 6 अक्टूबर 1994 को बिहार सरकार ने इसे सीतामढ़ी से अलग कर स्वतंत्र जिला घोषित किया था। जिले में 53 पंचायतें और 203 गांव शामिल हैं। करीब 7 लाख की आबादी वाला यह जिला लगभग 443 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
धार्मिक दृष्टि से भी शिवहर की पहचान काफी विशेष है। यहां स्थित प्राचीन बाबा भुवनेश्वर नाथ मंदिर लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण द्वापर काल में हुआ था और इसे एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया था। 1956 में प्रकाशित अंग्रेजी गजट में नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर और भारत के हरिहर क्षेत्र के बीच इस मंदिर के स्थित होने का उल्लेख मिलता है। कोलकाता हाईकोर्ट ने भी एक फैसले में इसे अति प्राचीन मंदिर माना था। मंदिर के पश्चिम भाग में स्थित तालाब की खुदाई वर्ष 1962 में संत प्रेम भिक्षु द्वारा कराई गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. श्वेता गुप्ता को मंत्रिमंडल में शामिल कर एनडीए शिवहर-सीतामढ़ी बेल्ट में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है। साथ ही सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अब बिहार की राजनीति में शिक्षित, पेशेवर और साफ छवि वाले नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
