झारखंड के देवघर स्थित त्रिकूट रोपवे हादसे को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन इस दर्दनाक दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। 10 अप्रैल 2022 को हुए इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 59 यात्री घंटों हवा में फंसे रहे थे। करीब 46 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी को सुरक्षित उतारा गया था। लेकिन, इस घटना की आपराधिक जांच अब तक अधूरी है। हादसे के बाद पीड़ित परिवार की ओर से दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (ड्रिल) और उसके अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें लापरवाही से मौत (304 ए) और मशीनरी के उपयोग में लापरवाही (287) जैसी धाराएं लगाई गईं। केस मोहनपुर थाना में दर्ज हुआ था, लेकिन शुरुआती जांच के बाद भी लंबे समय तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी। कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए। हालांकि, सरकार की ओर से पर्यटन विभाग ने रोपवे ऑपरेटर कंपनी को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया और करीब 9 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। 2024 में चार्जशीट, कार्रवाई निचले स्तर तक ही सीमित करीब दो साल बाद 12 जून 2024 को पुलिस ने इस मामले में सिर्फ साइट मैनेजर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका का भी जिक्र किया गया, लेकिन कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के अधिकारी तक सीमित रही। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर की गई। गंभीर सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदारी व्यापक स्तर पर तय हुई, तो सिर्फ जमानती धाराओं में ही मामला क्यों सीमित रखा गया?
त्रिकूट रोपवे हादसा: 4 साल बाद भी पीड़ितों को इंसाफ का इंतजार
झारखंड के देवघर स्थित त्रिकूट रोपवे हादसे को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन इस दर्दनाक दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। 10 अप्रैल 2022 को हुए इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 59 यात्री घंटों हवा में फंसे रहे थे। करीब 46 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी को सुरक्षित उतारा गया था। लेकिन, इस घटना की आपराधिक जांच अब तक अधूरी है। हादसे के बाद पीड़ित परिवार की ओर से दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (ड्रिल) और उसके अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें लापरवाही से मौत (304 ए) और मशीनरी के उपयोग में लापरवाही (287) जैसी धाराएं लगाई गईं। केस मोहनपुर थाना में दर्ज हुआ था, लेकिन शुरुआती जांच के बाद भी लंबे समय तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी। कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए। हालांकि, सरकार की ओर से पर्यटन विभाग ने रोपवे ऑपरेटर कंपनी को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया और करीब 9 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। 2024 में चार्जशीट, कार्रवाई निचले स्तर तक ही सीमित करीब दो साल बाद 12 जून 2024 को पुलिस ने इस मामले में सिर्फ साइट मैनेजर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका का भी जिक्र किया गया, लेकिन कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के अधिकारी तक सीमित रही। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर की गई। गंभीर सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदारी व्यापक स्तर पर तय हुई, तो सिर्फ जमानती धाराओं में ही मामला क्यों सीमित रखा गया?

