दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का असर हुआ है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान लेने के बाद कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड अंतर्गत डगरनवां पंचायत के काली पहाड़ी और चटनिया दह गांव में 20 साल पुराने जल संकट की समस्या का समाधान हो गया है।
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जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गांव में चापानल स्थापित किया है। इन गांवों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लगभग 100 लोग, जो करीब 10 परिवारों से संबंधित हैं, पिछले दो दशकों से पेयजल संकट से जूझ रहे थे। उन्हें घर से लगभग आधा किलोमीटर दूर जंगल में बहने वाले नालीनुमा पानी में चुआं खोदकर पानी छानना पड़ता था।
यह पानी जानवरों, द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता था, जिससे ग्रामीण अक्सर बीमार पड़ जाते थे। यह स्थिति ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोडरमा उपायुक्त को जल्द से जल्द समाधान का निर्देश दिया।
इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और पीएचडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) की एक टीम को मौके पर भेजकर जांच-पड़ताल करवाई। चूंकि यह गांव जंगल क्षेत्र में स्थित होने के कारण वन विभाग से विकास कार्यों की अनुमति मिलना एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि, अनुमति मिलने के बाद, सोमवार को उक्त गांव में डीप बोरिंग करवाते हुए एक चापानल स्थापित किया गया, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सका।
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कोडरमा के कारी पहाड़ी में जल संकट:20 साल से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं लोग, घर से आधा किलोमीटर दूर मिलता है पानी

कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड अंतर्गत डगरनवां पंचायत के कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांवों में लगभग 100 लोग पिछले 20 वर्षों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इन घने जंगलों के बीच बसे 10 परिवारों को पीने के पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पानी के लिए उन्हें घर से करीब आधा किलोमीटर दूर सोती नाला तक चढ़ाई-उतराई वाले रास्तों से गुजरना पड़ता है। वहां पहुंचकर वे पहले गंदे पानी से ही अपने बर्तन साफ करती हैं। पढ़िए पूरी खबर…


