Friday, May 15, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

कोडरमा में महिलाएं जूट उत्पाद बनाकर बन रहीं आत्मनिर्भर:राधा यादव ने 20 महिलाओं को दिया रोजगार, यूट्यूब देख सीखा कई प्रोडक्ट बनाना


कोडरमा जिले की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर रोजगार सृजित कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। कोडरमा सदर प्रखंड की राधा यादव और उनकी टीम इस बदलाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। कुछ साल पहले तक राधा यादव का जीवन केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक ही सीमित था। जीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्हें एक नई दिशा मिली। समूह के माध्यम से मिले प्रशिक्षण और सहयोग से उन्होंने जूट (पटसन) उत्पाद बनाने का कौशल सीखा। घरेलू उपयोग की विभिन्न वस्तुएं तैयार कर रही
आज राधा यादव और उनके साथ दर्जनों अन्य महिलाएं जूट से बैग, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की विभिन्न वस्तुएं तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। आय बढ़ने से इन महिलाओं का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। राधा के साथ लगभग 20 महिलाओं का एक समूह इस कार्य से जुड़ा हुआ है। समूह की अधिकांश महिलाएं एक साथ सिलाई मशीन का उपयोग कर थैले और अन्य सामानों की सिलाई व कढ़ाई करती हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार होते हैं। उनके उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। राधा यादव ने बताया कि इस कार्य के प्रति उनकी रुचि उनके बच्चों को स्कूल में मिलने वाले प्रोजेक्ट से जगी थी। उन्होंने बताया कि 2024 में जब उनके बच्चों को स्कूल में जूट से संबंधित कोई प्रोजेक्ट मिलता था, तो वे उसे बड़े चाव से बनाती थीं। इसके परिणामस्वरूप उनके बच्चों को प्रोजेक्ट में हमेशा प्रथम स्थान मिलता था। इसी से उन्हें लगा कि वे इस कार्य को रोजगार के रूप में और भी बेहतर तरीके से कर सकती हैं। सुतली बनाने से हुई शुरुआत उन्होंने बताया कि पहले तो उन्होंने सुतली (जूट का धागा) बनाने से इसकी शुरुआत की। धीरे-धीरे ये यूट्यूब से वीडिओ देखकर कई अन्य प्रोडक्ट बनाने लगीं। इसी दौरान जिला प्रशासन द्वारा झुमरीतिलैया शहर में लगाए गए आकांक्षा हाट में ssg के माध्यम से उन्हें अपने प्रोडक्ट्स की प्रदर्शनी के लिए स्टॉल लगाने की जगह मिली। जहां इनके प्रोडक्ट्स को जिला प्रशासन व लोगों ने खूब सराहा। इसके पश्चात वे तत्कालीन उपायुक्त से मिलीं और इन्हें तथा इनके समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाने का आग्रह किया। इसके बाद जन जागरण केंद्र द्वारा इन्हें तथा इनके साथ काम करने वाली समूह को 25 दिनों का प्रशिक्षण दिलवाया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण लेने के पश्चात उन्होंने एक सिलाई मशीन से अपने रोजगार की शुरुआत की। जिससे इन्होंने जूट के अलग-अलग प्रोडक्ट बनाने शुरू किए। इनके प्रोडक्ट की धीरे-धीरे मांग बढ़ने लगी। जिले के सरकारी मीटिंग में अधिकारियों के लिए उपयोग होने वाले प्लास्टिक फ़ाइल की जगह इनके जूट से बने फ़ाइल और फोल्डर की मांग बढ़ने लगी। बढ़ती मांग और समूह में लगातार जुड़ रही महिलाओं को ध्यान में रखते हुए इन्होंने जिला उद्योग केंद्र से 90 प्रतिशत अनुदान ( 4 लाख 50 हजार रुपए ) और अपने 50 हजार रुपए की लागत से सिलाई मशीन की संख्या बढ़ाई और आज ये अपने रोजगार को दिन प्रतिदिन नई ऊंचाईयों पर ले जा रही हैं। यहां काम करने वाली शोभा कुमारी ने बताया कि राधा के दृढ़ संकल्प और काम करने की इच्छा से ये प्रेरित हुईं और इनके साथ जुड़ गईं। इन्होंने बताया कि ये अपने घर के काम जल्द से जल्द निबटाकर यहाँ आ जाती हैं। जिसके कारण घर में खाली बैठने के जगह अब ये कुछ नया सीख पा रही हैं, साथ ही साथ इन्हें अब कुछ आमदनी भी हो रही है, जिससे ये आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। कोलकाता से मंगाती हैं रॉ मटेरियल राधा यादव ने कहा कि वे फिलहाल जुट से जो भी प्रोडक्ट्स बना रही हैं, उसका रॉ मटेरियल वे कोलकाता से मंगवा रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें एक झोला तैयार करने में करीब 120 रुपए का खर्च आता है, जबकि वे उसी 80 रुपए का मुनाफा के साथ 200 रुपए में बेच देती हैं। इस प्रकार से वे महीने का 10 से 12 हजार रुपए की आमदनी कर लेती हैं। उन्होंने कहा कि अभी तो उनके व्यापार की शुरुआत हुई है, जैसे-जैसे इनके प्रोडक्ट्स का प्रचार प्रसार होगा, वैसे वैसे डिमांड बढ़ेगी। डिमांड बढ़ने के पश्चात आमदनी भी बढ़ेगी।
प्लास्टिक थैले को पूर्णतः बंद करने की इच्छा इधर राधा यादव ने कहा कि उनका एक उद्देश्य यह भी है कि वे अपने शहर को प्लस्टिक मुक्त बनाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां प्लास्टिक के बने थैले इत्यादि से प्रदूषण बढ़ रही है। वहीं जुट के थैले पूरी तरह से इको फ्रेंडली हैं। सरकार के नो प्लास्टिक मुहिम को जूट के बने थैले के उपयोग से ही सार्थक किया जा सकता है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles