देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। वर्षों से विश्वविद्यालयों में लागू वह व्यवस्था, जिसमें छात्र को उसी विषय में स्नातकोत्तर (पीजी) करना अनिवार्य था, जिस विषय में उसने ऑनर्स किया हो, अब खत्म होने की ओर है। नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए पोस्ट ग्रेजुएट करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क ने उच्च शिक्षा के पारंपरिक ढांचे को पूरी तरह बदलने का रास्ता खोल दिया है। रांची यूनिवर्सिटी में पीजी का पहला बैच होगा, जिसमें छात्रों को यह अवसर मिलने जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्र केवल अपने ऑनर्स विषय तक सीमित नहीं रहेंगे। फ्रेमवर्क बनाने में शामिल शिक्षकों का कहना है कि भविष्य की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था में एक विषय- एक करियर का मॉडल प्रभावी नहीं रहेगा। इसलिए छात्रों को विषय बदलने और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने की स्वतंत्रता देना जरूरी है। इसी के तहत पीजी एडमिशन को मल्टीडिसिप्लीनरी और फ्लेक्सिबल बनाया गया है। बड़ी बाधा : एनईपी यूजी फर्स्ट बैच इसी साल होगा पास, पर सरकार से पीजी रेगुलेशन की मंजूरी नहीं यूजीसी के फ्रेमवर्क के अनुसार यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा पीजी का सिलेबस तैयार कर लिया गया है। लेकिन झारखंड सरकार द्वारा अभी तक एडॉप्ट नहीं किया गया है। राज्य में रांची यूनिवर्सिटी के स्नातक सेशन 2022-26 बैच के छात्र पहली बार नए ढांचे के तहत स्नातक पूरा करने जा रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि राज्य सरकार जल्द नए रेगुलेशन को स्वीकृति दे। अब तक कैसे चलता था सिस्टम झारखंड समेत देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों में अभी तक यही नियम लागू रहा है कि स्टूडेंट जिस विषय में ऑनर्स किया हो, उसी में उसे पीजी में एडमिशन मिलेगा। इच्छा रहने के बाद भी दूसरे विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं कर सकते थे। लेकिन एनईपी-2020 लागू होने के बाद यह संभव हो गया है। अब पीजी में एडमिशन के लिए संबंधित विषय की बाध्यता समाप्त हो गई है। अभी की स्थिति में प्रॉब्लम बीए इतिहास ऑनर्स के छात्र को पीजी इतिहास तक ही सीमित रहना विवशता थी। {राजनीति विज्ञान ऑनर्स का छात्र सोशियोलॉजी या इकोनॉमिक्स में प्रवेश नहीं मिलता था। {स्नातक स्तर पर चुना गया विषय ही छात्र के पूरे अकादमिक भविष्य को तय कर देता था। 3 उदाहरण से समझिए नया एडमिशन मॉडल साइंस स्ट्रीम के छात्रों को सबसे ज्यादा विकल्प : नई व्यवस्था लागू होने के बाद साइंस से स्नातक करने वाले छात्र केवल साइंस विषयों तक सीमित नहीं रहेंगे। वे आर्ट्स और कॉमर्स विषयों में पीजी कर सकेंगे। हालांकि अपने विषय के अलावा दूसरे विषय में एडमिशन के लिए नेशनल या यूनिवर्सिटी स्तर की प्रवेश परीक्षा में पात्रता हासिल करनी होगी। अब एक और दो साल का पीजी नई शिक्षा नीति के तहत स्नातकोत्तर शिक्षा की अवधि भी बदलने जा रही है। चार वर्षीय स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्र एक साल में पीजी कर सकेंगे। वहीं तीन वर्षीय स्नातक करने वाले छात्र को पीजी में दो साल पढ़ाई करनी पड़ेगी। यानी चार वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों को एक वर्षीय पीजी का विकल्प मिलेगा, जबकि पारंपरिक तीन वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों को दो वर्षीय पीजी की पढ़ाई करनी होगी। पीजी में मिलेंगे तीन विकल्प 1. केवल कोर्स वर्क : इस मॉडल में छात्र केवल रेगुलर पढ़ाई करेंगे और निर्धारित कोर्स पूरा करेंगे। 2. कोर्स वर्क और रिसर्च : इसमें छह महीने पढ़ाई और छह महीने रिसर्च कार्य दोनों शामिल होंगे। 3. केवल रिसर्च : इस मॉडल में छात्र एक साल यानि पूरे समय रिसर्च करेंगे। रिसर्च ट्रैक में प्रवेश के लिए स्नातक स्तर पर 75% अंक जरूरी है। कुल सीटों का लगभग 10% हिस्सा रिसर्च सीटों का होगा। कॉमर्स छात्रों के लिए भी खुलेगा नया रास्ता : अब तक कॉमर्स छात्रों का दायरा मुख्य रूप से अकाउंटेंसी, फाइनेंस और मैनेजमेंट तक सीमित माना जाता था। लेकिन नए ढांचे में कॉमर्स स्नातक के छात्र आर्ट्स विषयों में पीजी कर सकेंगे। लेकिन अपने विषय के अलावा अन्य विषय में पीजी करने के लिए नेशनल या यूनिवर्सिटी स्तर की प्रवेश परीक्षा में पात्रता हासिल करनी होगी। कला स्ट्रीम के छात्रों का बढ़ा दायरा : आर्ट्स के छात्रों को अब केवल अपने ऑनर्स विषय तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा। वे अपने संकाय के किसी भी विषय में पीजी कर सकेंगे। इंटरडिसिप्लीनरी कोर्स चुन सकेंगे। हालांकि अपने विषय के अलावा कला के दूसरे विषय में एडमिशन के लिए नेशनल या यूनिवर्सिटी स्तर की प्रवेश परीक्षा में पात्रता हासिल करनी होगी।
एनईपी 2020… अब ऑनर्स का बंधन खत्म, पसंद के विषय में कर सकेंगे पीजी
देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। वर्षों से विश्वविद्यालयों में लागू वह व्यवस्था, जिसमें छात्र को उसी विषय में स्नातकोत्तर (पीजी) करना अनिवार्य था, जिस विषय में उसने ऑनर्स किया हो, अब खत्म होने की ओर है। नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए पोस्ट ग्रेजुएट करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क ने उच्च शिक्षा के पारंपरिक ढांचे को पूरी तरह बदलने का रास्ता खोल दिया है। रांची यूनिवर्सिटी में पीजी का पहला बैच होगा, जिसमें छात्रों को यह अवसर मिलने जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्र केवल अपने ऑनर्स विषय तक सीमित नहीं रहेंगे। फ्रेमवर्क बनाने में शामिल शिक्षकों का कहना है कि भविष्य की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था में एक विषय- एक करियर का मॉडल प्रभावी नहीं रहेगा। इसलिए छात्रों को विषय बदलने और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने की स्वतंत्रता देना जरूरी है। इसी के तहत पीजी एडमिशन को मल्टीडिसिप्लीनरी और फ्लेक्सिबल बनाया गया है। बड़ी बाधा : एनईपी यूजी फर्स्ट बैच इसी साल होगा पास, पर सरकार से पीजी रेगुलेशन की मंजूरी नहीं यूजीसी के फ्रेमवर्क के अनुसार यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा पीजी का सिलेबस तैयार कर लिया गया है। लेकिन झारखंड सरकार द्वारा अभी तक एडॉप्ट नहीं किया गया है। राज्य में रांची यूनिवर्सिटी के स्नातक सेशन 2022-26 बैच के छात्र पहली बार नए ढांचे के तहत स्नातक पूरा करने जा रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि राज्य सरकार जल्द नए रेगुलेशन को स्वीकृति दे। अब तक कैसे चलता था सिस्टम झारखंड समेत देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों में अभी तक यही नियम लागू रहा है कि स्टूडेंट जिस विषय में ऑनर्स किया हो, उसी में उसे पीजी में एडमिशन मिलेगा। इच्छा रहने के बाद भी दूसरे विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं कर सकते थे। लेकिन एनईपी-2020 लागू होने के बाद यह संभव हो गया है। अब पीजी में एडमिशन के लिए संबंधित विषय की बाध्यता समाप्त हो गई है। अभी की स्थिति में प्रॉब्लम बीए इतिहास ऑनर्स के छात्र को पीजी इतिहास तक ही सीमित रहना विवशता थी। {राजनीति विज्ञान ऑनर्स का छात्र सोशियोलॉजी या इकोनॉमिक्स में प्रवेश नहीं मिलता था। {स्नातक स्तर पर चुना गया विषय ही छात्र के पूरे अकादमिक भविष्य को तय कर देता था। 3 उदाहरण से समझिए नया एडमिशन मॉडल साइंस स्ट्रीम के छात्रों को सबसे ज्यादा विकल्प : नई व्यवस्था लागू होने के बाद साइंस से स्नातक करने वाले छात्र केवल साइंस विषयों तक सीमित नहीं रहेंगे। वे आर्ट्स और कॉमर्स विषयों में पीजी कर सकेंगे। हालांकि अपने विषय के अलावा दूसरे विषय में एडमिशन के लिए नेशनल या यूनिवर्सिटी स्तर की प्रवेश परीक्षा में पात्रता हासिल करनी होगी। अब एक और दो साल का पीजी नई शिक्षा नीति के तहत स्नातकोत्तर शिक्षा की अवधि भी बदलने जा रही है। चार वर्षीय स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्र एक साल में पीजी कर सकेंगे। वहीं तीन वर्षीय स्नातक करने वाले छात्र को पीजी में दो साल पढ़ाई करनी पड़ेगी। यानी चार वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों को एक वर्षीय पीजी का विकल्प मिलेगा, जबकि पारंपरिक तीन वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों को दो वर्षीय पीजी की पढ़ाई करनी होगी। पीजी में मिलेंगे तीन विकल्प 1. केवल कोर्स वर्क : इस मॉडल में छात्र केवल रेगुलर पढ़ाई करेंगे और निर्धारित कोर्स पूरा करेंगे। 2. कोर्स वर्क और रिसर्च : इसमें छह महीने पढ़ाई और छह महीने रिसर्च कार्य दोनों शामिल होंगे। 3. केवल रिसर्च : इस मॉडल में छात्र एक साल यानि पूरे समय रिसर्च करेंगे। रिसर्च ट्रैक में प्रवेश के लिए स्नातक स्तर पर 75% अंक जरूरी है। कुल सीटों का लगभग 10% हिस्सा रिसर्च सीटों का होगा। कॉमर्स छात्रों के लिए भी खुलेगा नया रास्ता : अब तक कॉमर्स छात्रों का दायरा मुख्य रूप से अकाउंटेंसी, फाइनेंस और मैनेजमेंट तक सीमित माना जाता था। लेकिन नए ढांचे में कॉमर्स स्नातक के छात्र आर्ट्स विषयों में पीजी कर सकेंगे। लेकिन अपने विषय के अलावा अन्य विषय में पीजी करने के लिए नेशनल या यूनिवर्सिटी स्तर की प्रवेश परीक्षा में पात्रता हासिल करनी होगी। कला स्ट्रीम के छात्रों का बढ़ा दायरा : आर्ट्स के छात्रों को अब केवल अपने ऑनर्स विषय तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा। वे अपने संकाय के किसी भी विषय में पीजी कर सकेंगे। इंटरडिसिप्लीनरी कोर्स चुन सकेंगे। हालांकि अपने विषय के अलावा कला के दूसरे विषय में एडमिशन के लिए नेशनल या यूनिवर्सिटी स्तर की प्रवेश परीक्षा में पात्रता हासिल करनी होगी।


