जिला के भंडरिया प्रखंड के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गांव-गांव और टोले-टोले में सोलर युक्त जलमीनार का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज अधिकांश जलमीनार शोपीस बनकर रह गए हैं। पेयजल स्वच्छता विभाग, कल्याण विभाग तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के 15वें वित्त मद से करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए इन जलमीनारों की स्थिति बदहाल हो चुकी है। जानकारी के अनुसार भंडरिया प्रखंड की सभी छह पंचायतों जेनेवा, मदगड़ी, करचाली, भंडरिया, फकीराडीह, बिजका में लगभग 16 करोड़ की लागत से 433 सोलर जलमीनार स्थापित किए गए हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को गर्मी के दिनों में भी स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान में लगभग 100 जलमीनारों को छोड़ शेष बंद पड़े हैं। भीषण गर्मी में ग्रामीणों को फिर से पुराने कुओं और चापाकलों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जलमीनारों में पाइप टूटकर गिर गए हैं, कहीं पानी की टंकी क्षतिग्रस्त हो गई है तो कई जगहों पर स्टार्टर और मोटर खराब पड़े हैं। कई जलमीनार महीनों से बंद हैं, लेकिन उनकी मरम्मत कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। जब जलमीनार लगाई गई थी तब लोगों में काफी उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें स्वच्छ पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, लेकिन कुछ ही वर्षों में अधिकांश योजनाएं दम तोड़ने लगीं। विभागीय लापरवाही और रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपए की योजना बेकार साबित हो रही है। गर्मी बढ़ने के साथ पेयजल संकट और गहरा गया है। कई गांवों में महिलाएं सुबह से ही पानी भरने के लिए कुओं के पास कतार में खड़ी नजर आती हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते खराब जलमीनारों की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से बंद पड़े जलमीनारों की जांच कर शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके और करोड़ों रुपये से बनी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके। मुखिया से बोलकर ठीक कराएंगे इस संबंध में भंडरिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित कुमार ने कहा कि प्रखंड में विभिन्न योजना मद से पंचायत में जल मीनार लगाया गया है। वर्तमान समय में उनके पास जल मीनार से संबंधित विस्तृत डाटा उपलब्ध नहीं है। वह अपने पंचायत सेवकों को निर्देश देकर तत्काल डाटा जुटा रहे हैं। इसके बाद मुखिया को निर्देश देकर सभी जल मीनार को तत्काल ठीक कर लिया जाएगा।
भंडरिया में 16 करोड़ से छह पंचायतों में 433 जलमीनार लगी, मात्र 100 ही चालू
जिला के भंडरिया प्रखंड के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गांव-गांव और टोले-टोले में सोलर युक्त जलमीनार का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज अधिकांश जलमीनार शोपीस बनकर रह गए हैं। पेयजल स्वच्छता विभाग, कल्याण विभाग तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के 15वें वित्त मद से करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए इन जलमीनारों की स्थिति बदहाल हो चुकी है। जानकारी के अनुसार भंडरिया प्रखंड की सभी छह पंचायतों जेनेवा, मदगड़ी, करचाली, भंडरिया, फकीराडीह, बिजका में लगभग 16 करोड़ की लागत से 433 सोलर जलमीनार स्थापित किए गए हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को गर्मी के दिनों में भी स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान में लगभग 100 जलमीनारों को छोड़ शेष बंद पड़े हैं। भीषण गर्मी में ग्रामीणों को फिर से पुराने कुओं और चापाकलों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जलमीनारों में पाइप टूटकर गिर गए हैं, कहीं पानी की टंकी क्षतिग्रस्त हो गई है तो कई जगहों पर स्टार्टर और मोटर खराब पड़े हैं। कई जलमीनार महीनों से बंद हैं, लेकिन उनकी मरम्मत कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। जब जलमीनार लगाई गई थी तब लोगों में काफी उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें स्वच्छ पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, लेकिन कुछ ही वर्षों में अधिकांश योजनाएं दम तोड़ने लगीं। विभागीय लापरवाही और रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपए की योजना बेकार साबित हो रही है। गर्मी बढ़ने के साथ पेयजल संकट और गहरा गया है। कई गांवों में महिलाएं सुबह से ही पानी भरने के लिए कुओं के पास कतार में खड़ी नजर आती हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते खराब जलमीनारों की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से बंद पड़े जलमीनारों की जांच कर शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके और करोड़ों रुपये से बनी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके। मुखिया से बोलकर ठीक कराएंगे इस संबंध में भंडरिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित कुमार ने कहा कि प्रखंड में विभिन्न योजना मद से पंचायत में जल मीनार लगाया गया है। वर्तमान समय में उनके पास जल मीनार से संबंधित विस्तृत डाटा उपलब्ध नहीं है। वह अपने पंचायत सेवकों को निर्देश देकर तत्काल डाटा जुटा रहे हैं। इसके बाद मुखिया को निर्देश देकर सभी जल मीनार को तत्काल ठीक कर लिया जाएगा।
