खाड़ी देशों में जारी ईरान-इराक युद्ध का असर अब बिहार के अररिया जिले में भी दिखने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण जिले के पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की भीड़ काफी कम हो गई है। लोग अब महंगे ईंधन से बचने के लिए पैदल चलने या बस, ट्रेन और ऑटो जैसे सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे रहे हैं।शहर के गोढ़ी चौक स्थित एक प्रमुख पेट्रोल पंप के मैनेजर अश्विनी कुमार सिन्हा ने बताया कि ऊपर से सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। अब किसी भी ग्राहक को 3 से 4 हजार रुपये से अधिक का पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नए ग्राहकों को डब्बे या कैन में ईंधन देने से भी मना किया जा रहा है। मैनेजर सिन्हा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन युद्ध के कारण आपूर्ति में देरी हो रही है। प्रति यूनिट लगभग 20 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा
इस स्थिति के कारण सरकार को प्रति यूनिट लगभग 20 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसलिए, आम लोगों से ईंधन की अनावश्यक बचत करने की अपील की जा रही है।जिले के कई पेट्रोल पंप मालिकों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में बिक्री में 25-30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। खासकर दोपहिया और चारपहिया वाहन मालिक अब केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही पंप पर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पहले से ही ईंधन की महंगाई से परेशान थे, अब युद्ध की खबरों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय निवासी कमल कुमार ने बताया, “पहले हम 500-600 रुपये का तेल भरवाते थे, लेकिन अब 300 रुपये से ज्यादा नहीं भरवा रहे हैं। परिवहन लागत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो गई
बाकी काम बस या ऑटो से निपटा रहे हैं।” बाजार में सब्जी-फल विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर दिख रहा है, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी में तनाव लंबा खिंचा तो देशभर में ईंधन संकट गहरा सकता है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। अररिया जैसे छोटे जिले में भी इसका प्रभाव दिखना चेतावनी का संकेत है। लोगों से अपील की जा रही है कि ईंधन का जरूरत पड़ने पर उपयोग करें और अनावश्यक यात्राओं से बचें।

