हमारे झारखंड की माटी के महानायक और जल-जंगल-जमीन की लड़ाई के प्रतीक ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा का गौरवशाली इतिहास अब कैनवास पर मुस्कुराएगा। मौका है मोरहाबादी स्थित डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (टीआरआई) के सभागार में सोमवार से शुरू हुई विशेष 10 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र व टीआरआई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह अनूठी कार्यशाला 27 मई 2026 तक चलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड की पारंपरिक लोक कला शैलियों के जरिए भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके उलगुलान और वैचारिक क्रांति को नई पीढ़ी के सामने लाना है। प्रो. एसएन मुंडा व डॉ. सोमा सिंह मुंडा ने कलाकारों से अपील की कि वे अपनी कूची भगवान बिरसा मुंडा के जीवन की सकारात्मक ऊर्जा और मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करें। उनके हर पहलू को आकार दें। नई पीढ़ी के लिए मील का पत्थर होगी यह कार्यशाला समारोह में जुटे शहर के प्रबुद्ध शिक्षाविदों व कलाकारों ने इस पहल को खूब सराहा। वहीं, जाने-माने साहित्यकार महादेव टोप्पो, डॉ. कमल बोस और डॉ. बिनोद कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि कला के माध्यम से इतिहास का यह दस्तावेजीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शिका बनेगा, जो उन्हें अपनी जड़ों और महानायकों पर गर्व करना सिखाएगा। माटी के ये मशहूर फनकार कैनवास पर बिखेर रहे हैं जादू वरिष्ठ कलाकार सीआर हेम्ब्रम के क्यूरेशन में चल रही इस कार्यशाला में राज्य के कोने-कोने से आए प्रतिष्ठित पारंपरिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं: पैतकर शैली: शालिनी सोय, किशोर गायेन और गणेश गायेन। जादोपटिया शैली: सुधा कुमारी, सुचित्रा हेम्ब्रम और विपासा कुनारी। सोहराई शैली: मनीष महतो और अनीता देवी। उरांव चित्रकला: सुमंती भगत और प्रीति बाला गाड़ी। 1200 मीटर लंबे ‘महाभारत स्क्रॉल’ जैसा दिखेगा जादू आईजीएनसीए के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कुमार संजय झा ने बताया कि इससे पहले राठवा जनजाति के कलाकारों ने 1200 मीटर लंबा ‘महाभारत स्क्रॉल’ तैयार किया था, जो देश-दुनिया में सराहा गया। ठीक उसी तर्ज पर रांची में हो रहा यह प्रयोग भगवान बिरसा के आदर्शों को समाज के दिलो-दिमाग तक पहुंचाएगा।


