बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत प्रशांत किशोर आज दरभंगा पहुंचे। उन्होंने लहेरियासराय स्थित नेहरू स्टेडियम में जन सुराज पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार के छह महीने के कार्यकाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में सिर्फ नेताओं के चेहरे बदले हैं, लेकिन समस्याएं अब भी वहीं की वहीं हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने अपना आवास छोड़कर पटना के बिहटा स्थित जन सुराज नव निर्माण आश्रम में रहना शुरू कर दिया है और बिहार में बदलाव आने तक वहीं से पार्टी के कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान रोजगार, पलायन और शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन छह महीने बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। मजदूरों और युवाओं का पलायन अब भी जारी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार चुनाव में जिन नेताओं को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर पेश किया गया, वे खुद ही पलायन कर गए, जबकि राज्य से मजदूरों और युवाओं का पलायन अब भी जारी है। एक करोड़ नौकरी देने के वादे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। BPSC TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुई कार्रवाई को उन्होंने चिंताजनक बताया। परिवारवाद पर हमला बोलते हुए पीके ने कहा कि बिहार की राजनीति में नेताओं ने पहले से ही अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर लिया है। नेता का बेटा चाहे पढ़ा-लिखा हो या नहीं, वही आगे बढ़ता है, जबकि आम लोगों के बच्चे पढ़ाई के बाद भी बेरोजगार रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि जनता अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करने के बजाय नेताओं के चेहरे देखकर वोट देती रही है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर भी निशाना साधा। कहा कि बिहार के नए मुख्यमंत्री की प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात है। अडानी की ओर से आंखों का अस्पताल खोलने की चर्चा हो रही है, लेकिन पिरपैंती बिजली परियोजना में कथित घोटाले पर कोई बात नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के लोगों के हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने कहा कि अब खबर पेपर लीक होने की नहीं, बल्कि बिना पेपर लीक परीक्षा होने की बनेगी। उन्होंने कहा कि जब तक लोग शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर वोट नहीं करेंगे, तब तक बिहार में भ्रष्टाचार और पेपर लीक नहीं रुकेगा। मुख्यमंत्री आवास पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य है, लेकिन मुख्यमंत्री का बंगला देश में सबसे बड़ा है। एक तरफ बिहार के युवा रोजगार के लिए दिल्ली और मुंबई में छोटे कमरों में रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री को 25 एकड़ का बंगला भी छोटा पड़ रहा है। बैठक में जन सुराज के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें किशोर कुमार मुन्ना, प्रो. रामबली चंद्रवंशी, जितेंद्र मिश्रा, सरवर अली, ललन यादव, रत्नेश्वर ठाकुर, निर्मल मिश्रा, मुमताज अंसारी और अनूप मैथिल शामिल थे।
'मुख्यमंत्री को 25 एकड़ का बंगला भी छोटा पड़ रहा':प्रशांत किशोर बोले- बिहार में सिर्फ चेहरे बदले, समस्याएं जस की तस
बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत प्रशांत किशोर आज दरभंगा पहुंचे। उन्होंने लहेरियासराय स्थित नेहरू स्टेडियम में जन सुराज पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार के छह महीने के कार्यकाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में सिर्फ नेताओं के चेहरे बदले हैं, लेकिन समस्याएं अब भी वहीं की वहीं हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने अपना आवास छोड़कर पटना के बिहटा स्थित जन सुराज नव निर्माण आश्रम में रहना शुरू कर दिया है और बिहार में बदलाव आने तक वहीं से पार्टी के कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान रोजगार, पलायन और शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन छह महीने बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। मजदूरों और युवाओं का पलायन अब भी जारी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार चुनाव में जिन नेताओं को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर पेश किया गया, वे खुद ही पलायन कर गए, जबकि राज्य से मजदूरों और युवाओं का पलायन अब भी जारी है। एक करोड़ नौकरी देने के वादे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। BPSC TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुई कार्रवाई को उन्होंने चिंताजनक बताया। परिवारवाद पर हमला बोलते हुए पीके ने कहा कि बिहार की राजनीति में नेताओं ने पहले से ही अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर लिया है। नेता का बेटा चाहे पढ़ा-लिखा हो या नहीं, वही आगे बढ़ता है, जबकि आम लोगों के बच्चे पढ़ाई के बाद भी बेरोजगार रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि जनता अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करने के बजाय नेताओं के चेहरे देखकर वोट देती रही है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर भी निशाना साधा। कहा कि बिहार के नए मुख्यमंत्री की प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात है। अडानी की ओर से आंखों का अस्पताल खोलने की चर्चा हो रही है, लेकिन पिरपैंती बिजली परियोजना में कथित घोटाले पर कोई बात नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के लोगों के हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने कहा कि अब खबर पेपर लीक होने की नहीं, बल्कि बिना पेपर लीक परीक्षा होने की बनेगी। उन्होंने कहा कि जब तक लोग शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर वोट नहीं करेंगे, तब तक बिहार में भ्रष्टाचार और पेपर लीक नहीं रुकेगा। मुख्यमंत्री आवास पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य है, लेकिन मुख्यमंत्री का बंगला देश में सबसे बड़ा है। एक तरफ बिहार के युवा रोजगार के लिए दिल्ली और मुंबई में छोटे कमरों में रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री को 25 एकड़ का बंगला भी छोटा पड़ रहा है। बैठक में जन सुराज के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें किशोर कुमार मुन्ना, प्रो. रामबली चंद्रवंशी, जितेंद्र मिश्रा, सरवर अली, ललन यादव, रत्नेश्वर ठाकुर, निर्मल मिश्रा, मुमताज अंसारी और अनूप मैथिल शामिल थे।


