“पुलवामा अटैक में शामिल हमजा बुरहान मारा गया है। मन को थोड़ी शांति जरूर मिली है, लेकिन बेटे के शहीद होने का गम आज भी है। चैन की नींद नहीं आती। जितने भी आतंकवादियों के सरगना हैं, उन्हें खत्म कर देना चाहिए। ये लोग हमारे देश के नौजवानों को चुनौती देते हैं। इनका सफाया होगा तभी पुलवामा अटैक में शहीद जवानों की आत्मा को शांति मिलेगी। मैं अपने शहीद बेटे रतन ठाकुर का हर साल 14 फरवरी को श्रद्धांजलि दिवस मनाता हूं। खर्च में कटौती कर 10 लोगों को जुटाता हूं। सरकार ने उस वक्त जो वादे किए थे, वो पूरे नहीं हुए।” ये बातें पुलवामा अटैक में शहीद रतन ठाकुर के पिता रामनिरंजन ठाकुर ने कही हैं। हमजा की मौत के बाद भास्कर रिपोर्टर शहीद के घर पहुंचे और पिता से बातचीत की। पिता के मुताबिक, पुलिस अटैक के बाद सरकार ने कोई वादे पूरे नहीं किए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… शहीद बेटे को यादकर भावुक हुए पिता भास्कर रिपोर्टर जब शहीद के घर पहुंचे, तो बेटे को खोने का दर्द आज भी पिता की आंखों में साफ दिखाई दे रहा था। जब उन्हें बताया गया कि जिस हमले में उनका बेटा शहीद हुआ था, उसमें शामिल एक आतंकी ढेर कर दिया गया है, तो उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा। बगल में शहीद बेटे की तस्वीर लगी हुई थी, जिसे देखकर वे भावुक हो गए। पिता रामनिरंजन ने कहा कि उस समय जो दर्द था, वह आज भी वैसा ही बना हुआ है। बेटे को पालकर बड़ा किया, पर सुख नहीं मिला शहीद के पिता रामनिरंजन ठाकुर ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, लेकिन उसका सुख उन्हें नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि सरकार को आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पुलवामा जैसी घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और यह बेहद दर्दनाक हादसा था। उन्होंने आगे कहा कि हमारे जवान कहीं जा रहे थे, तभी उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तान की ओर से की गई इस नापाक हरकत को कभी माफ नहीं किया जा सकता। जैसी घोषणाएं हुई थी, वैसा नहीं हुआ रतन इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसी की कमाई से हमारे घर का चूल्हा जलता था। उस समय सरकार और नेताओं की ओर से बहुत घोषणाएं की थी। यह मिलेगा, वह मिलेगा, आज तक धरातल पर हमें कुछ नहीं मिला। हालांकि, राज्य सरकार और माननीय मुख्यमंत्री ने हमारे छोटे बेटे को नौकरी दी है। पोता भी फौज में जाना चाहता है रामनिरंजन ठाकुर बताते हैं कि रतन जब शहीद हुए थे, उस समय उनका बेटा कृष्णा पहली कक्षा में पढ़ता था। पिता के जाने के बाद वह भी फौज में जाने की बात करता है। वह कहता है कि वह अपने पापा की तरह बनना चाहता है और फौजी बनकर उनके दुश्मनों से बदला लेना चाहता है। रतन की शादी दिसंबर 2014 में राजनंदनी से हुई थी। परिवार का मूल घर मदारगंज पंचायत के रतनपुर गांव में है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए वे छोटे बेटे मिलन, पोते कृष्णा और छोटी बेटी नीतू को शहर लेकर आ गए। बड़ी बेटी सोनी बिहार पुलिस में कार्यरत है और उसकी शादी हो चुकी है। ड्यूटी पर जाने से पहले रतन ने पत्नी से की थी बात शहीद रतन 2011 में CRPF में भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग गढ़वा में हुई थी। घटना से एक दिन पहले उन्होंने अपनी पत्नी राजनंदनी को फोन कर बताया था कि वे श्रीनगर जा रहे हैं और शाम तक अपनी पोस्ट पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा था कि इसके बाद बात करेंगे। अगले दिन टीवी पर आतंकी हमले की खबर चल रही थी। परिवार ने रतन के बारे में जानकारी के लिए कमांडर से संपर्क किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। उसी समय रतन का मोबाइल भी बंद था। बाद में परिवार को उनके शहीद होने की सूचना मिली। अब जाने हमजा की मौत कैसे और कहां हुई… हमजा को अज्ञात हमलावरों ने गोलियां मारी पुलवामा में 2020 में हुए ग्रेनेड हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उस पर कई गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। भारत ने 2022 में हमजा बुरहान को UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी था।
भारत से पाकिस्तान गया, फिर आतंकी संगठन से जुड़ा सरकार के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। 23 साल का हमजा, आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा हुआ था। अल बद्र को सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया था। वहां जाकर वह अल बद्र में शामिल हो गया और बाद में संगठन का सक्रिय आतंकी और कमांडर बन गया। अभी वह पाकिस्तान से ही काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि वह युवाओं को अल बद्र में शामिल होने के लिए उकसाता था और फंडिंग भी करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार 2020 में CRPF जवानों पर ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा।
