भागलपुर43 मिनट पहले
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भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज बनाया जा रहा है। बिहार देश का पहला राज्य है जहां टूटे हुए पुल पर बेली ब्रिज का निर्माण हो रहा है। इसमें काफी सावधानियां बरती जा रही हैं। थोड़ी सी भी चूक पर बड़ा हादसा हो सकता है।
पुल की झमता 10 टन भार सहने की होगी। इसे बनाने में BRO (Border Roads Organisation) के करीब 100 इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी लगे हैं। जो दिन रात काम कर रहे हैं। 7 जून से पहले ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा। लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
वहीं, विक्रमशीला सुते के पुराने मरम्मत प्राक्कलन को रद्द कर दिया गया है। अब नए सिरे से डीपीआर तैयार हो रही है। पहले मरम्मत की लागत 26 करोड़ रुपए थी। जो बढ़कर 80 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
ब्रिज की दो तस्वीरें….

ब्रिज पर डेस्क बिछाने का काम पूरा।

ब्रिज की चौड़ाई 5 मीटर है।
पहला बेली ब्रिल शनिवार तक तैयार हो जाएगा
विक्रमशिला सेतु पर छोटे वाहनों का परिचालन जून के पहले सप्ताह से शुरू कराने की तैयारी तेज हो गई है। बीआरओ की टीम दिन-रात मेहनत कर बेली ब्रिज निर्माण में जुटी है। गुरुवार शाम तक पहले बेली ब्रिज पर डेक्स यानी प्लेट बिछाने का काम पूरा कर लिया गया।
अब दोनों ओर रैंप तैयार किए जा रहे हैं। बीआरओ अधिकारी के अनुसार शनिवार तक पहला बेली ब्रिज बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद रविवार से 12 मीटर लंबे दूसरे बेली ब्रिज का निर्माण शुरू होगा।
इसके लिए कोलकाता से सभी जरूरी सामान भागलपुर पहुंच चुका है। वहीं, तीसरे 24 मीटर लंबे बेली ब्रिज का सामान भी दो दिनों में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। दूसरा ब्रिज तैयार होते ही बीआरओ की टीम तीसरे ब्रिज के निर्माण में जुट जाएगी।
ब्रिज पर डेस्क बिछाने से पहले की तस्वीरें…

विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से में बना रहा बेली ब्रिज

बेली ब्रिज का ढांचा बनाते कर्मी।
विक्रमशिला सेतु मरम्मत कार्य पुल निर्माण निगम कर रहा
बेली ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी बीआरओ को मिली है, जबकि स्थायी मरम्मत का कार्य बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को दिया गया है। कोलकाता से सेना में उपयोग होने वाला विशेष बेली ब्रिज सामग्री ट्रकों भागलपुर पहुंची है।
चौथा स्पेन भी प्रभावित हो रहा है
BRO के एडिशनल डायरेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि ब्रिज गिरने के बाद जैसे ही सूचना मिली, हमारी टीम तुरंत साइट पर मोबिलाइज हो गई। दिन-रात लगातार काम किया जा रहा है। पहाड़ी इलाके से आए कर्मियों के लिए तेज धूप में काम करना कठिन है, फिर भी दिन और रात दोनों समय कार्य जारी है।
जल्द से जल्द ब्रिज तैयार हो ताकि आवागमन फिर से शुरू हो सके। फिलहाल एक ब्रिज तैयार कर लिया गया है। 2 ब्रिज बनाए जाने हैं। जून के पहले सप्ताह तक दोनों ब्रिज लॉन्च होने की संभावना है। हालांकि अब एक चौथा स्पैन भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। इस संबंध में सचिव स्तर पर चर्चा हुई है और रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखने की प्रक्रिया होगी। मंत्रालय से जो निर्देश मिलेगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बेली ब्रिज से हल्के वाहन ही गुजरेंगे
कहा कि इस तरह का ब्रिज पहली बार बनाया जा रहा है। यह सामान्य ब्रिज नहीं है, बल्कि एक क्षतिग्रस्त ब्रिज के ऊपर दूसरा ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए विशेष तकनीकी कौशल और सावधानी की जरूरत होती है। ब्रिज पर केवल हल्के वाहन ही चल सकेंगे। चूंकि यह ब्रिज पहले से कमजोर पड़े ढांचे के ऊपर बनाया जा रहा है, इसलिए भारी वाहनों के गुजरने से इसके खिसकने का खतरा बना रहेगा। इसी कारण यहां वाहनों की आवाजाही सीमित रखी जाएगी।

समानांतर नए फोरलेन पुल निर्माण का कार्य भी जारी रहेगा
हादसे के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हवाई सर्वेक्षण कर अधिकारियों को तत्काल राहत और मरम्मत कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। इसके बाद अस्थायी बेली ब्रिज निर्माण का फैसला लिया गया। क्षतिग्रस्त हिस्से के करीब 34 मीटर गैप पर अस्थायी संरचना तैयार की जा रही है। मौके पर भारी मशीनें, क्रेन, लोहे के स्ट्रक्चर और तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है।
स्थायी मरम्मत और समानांतर नए फोरलेन पुल निर्माण का कार्य अलग से जारी रहेगा। मुख्य सचिव ने पहले ही निर्देश दिया था कि विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहा नया पुल 2027 तक हर हाल में चालू कराया जाए।
नाव से आना-जाना कर रहे लोग
भागलपुर में विक्रमशिला पुर टूटने के बाद प्रशासन ने अस्थायी राहत के तौर पर नाव और स्टीमर सेवा शुरू कराई है। सुबह 5 बजे से शाम 5;30 बजे तक नावें चलाई जा रही हैं। निजी नाव चालकों का रजिस्ट्रेशन किया गया और किराया भी तय किया गया, ताकि यात्रियों से मनमानी वसूली न हो। कई लोग अब बरारी घाट और महादेवपुर घाट के बीच नाव से आवागमन कर रहे हैं।
करीब 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु भागलपुर को नवगछिया और सीमांचल से जोड़ने वाला बिहार का महत्वपूर्ण पुल है। इसका उद्घाटन वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था। पुल के निर्माण पर उस समय सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए थे। करीब 25 वर्ष पुराने इस पुल को पहले भी जर्जर बताया जाता रहा था।



