रिम्स की करोड़ों की जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले की जांच अब ईडी भी करेगा। जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत इंफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर ली है। अब ईडी पूरे मामले में हुए वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल को खंगालेगा। अभी इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कर रही है। एसीबी में दर्ज एफआईआर को ही आधार बनाते हुए ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है। इस मामले में एसीबी ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें राजकिशोर बड़ाईक व कार्तिक बड़ाईक (फर्जी वंशावली बनाने का मुख्य आरोपी), चेतन कुमार (फर्जी वंशावली के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी लेने वाला) और राजेश कुमार झा (बिल्डर्स के साथ मिलकर जमीन की डील कराने वाला दलाल) शामिल है। एसीबी जांच में पता चला है कि इस घोटाले को सुनियोजित तरीके से कई चरणों में अंजाम दिया गया। पहले फर्जी वंशावली तैयार की गई। उसके आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी लिया गया। सरकारी जमीन पर बहुमंजिली इमारत और अपार्टमेंट बनाकर उसका सौदा किया गया। अब इस मामले में ईडी की एंट्री के बाद जांच का दायरा सिर्फ इन चार आरोपियों तक ही सीमित नहीं रहेगा। रजिस्ट्री ऑफिस के सब-रजिस्ट्रार और अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी, दाखिल-खारिज करने वाले अंचल अधिकारी और नक्शा पास करने वाले रांची नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी। एसीबी कोर्ट : दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज रिम्स की जमीन फर्जीवाड़ा मामले में एसीबी के विशेष जज योगेश कुमार की कोर्ट ने गुरुवार को राजेश झा और चेतन कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं सुमित्रा कुमारी बड़ाईक और मुन्नी कुमारी की अग्रिम जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी। एसीबी ने सात अप्रैल को राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार किया था। यह मामला रिम्स की 9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 5 जनवरी को यह केस दर्ज किया गया था।
रिम्स जमीन घोटाला:अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले की अब ईडी खंगालेगा मनी ट्रेल
रिम्स की करोड़ों की जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले की जांच अब ईडी भी करेगा। जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत इंफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर ली है। अब ईडी पूरे मामले में हुए वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल को खंगालेगा। अभी इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कर रही है। एसीबी में दर्ज एफआईआर को ही आधार बनाते हुए ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है। इस मामले में एसीबी ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें राजकिशोर बड़ाईक व कार्तिक बड़ाईक (फर्जी वंशावली बनाने का मुख्य आरोपी), चेतन कुमार (फर्जी वंशावली के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी लेने वाला) और राजेश कुमार झा (बिल्डर्स के साथ मिलकर जमीन की डील कराने वाला दलाल) शामिल है। एसीबी जांच में पता चला है कि इस घोटाले को सुनियोजित तरीके से कई चरणों में अंजाम दिया गया। पहले फर्जी वंशावली तैयार की गई। उसके आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी लिया गया। सरकारी जमीन पर बहुमंजिली इमारत और अपार्टमेंट बनाकर उसका सौदा किया गया। अब इस मामले में ईडी की एंट्री के बाद जांच का दायरा सिर्फ इन चार आरोपियों तक ही सीमित नहीं रहेगा। रजिस्ट्री ऑफिस के सब-रजिस्ट्रार और अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी, दाखिल-खारिज करने वाले अंचल अधिकारी और नक्शा पास करने वाले रांची नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी। एसीबी कोर्ट : दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज रिम्स की जमीन फर्जीवाड़ा मामले में एसीबी के विशेष जज योगेश कुमार की कोर्ट ने गुरुवार को राजेश झा और चेतन कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं सुमित्रा कुमारी बड़ाईक और मुन्नी कुमारी की अग्रिम जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी। एसीबी ने सात अप्रैल को राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार किया था। यह मामला रिम्स की 9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 5 जनवरी को यह केस दर्ज किया गया था।

