झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत से पहले गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने मीडिया से कहा कि ‘नो नोटिस, नो डिलीशन’ नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा। घर-घर सर्वेक्षण के दौरान यदि मतदाता अपने पते पर नहीं मिलता है, तो बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) उसे तुरंत मृत या स्थानांतरित नहीं मान सकते। बीएलओ को अलग-अलग दिन और तीन बार संबंधित घर जाना होगा। ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता वहां नहीं रह रहा है। बीएलओ को अपनी रिपोर्ट में तीनों दौरों की तारीख और समय दर्ज करना अनिवार्य होगा। यदि बीएलओ किसी मतदाता को मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित चिह्नित करता है, तो निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) संबंधित मतदाता को नोटिस भेजेंगे। -शेष पेज 9 पर 23 मई को सभी मतदान केंद्रों पर प्रकाशित होगी अनमैप्ड की सूची 23 मई को सभी मतदान केंद्रों पर अनमैप्ड वोटरों की सूची प्रकाशित की जाएगी। इसमें बीएलओ के नाम और मोबाइल नंबर भी होंगे। एक भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से न छूटे, इसी लक्ष्य के साथ अभियान चलाया जा रहा है। तैयारी और प्रशिक्षण : 20 जून से 29 जून घर-घर सत्यापन : 30 जून से 29 जुलाई प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन : 5 अगस्त दावा व आपत्ति अवधि : 5 अगस्त से 4 सितंबर दावा-आपत्ति का निपटारा : 3 अक्टूबर तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन : 7 अक्टूबर अब तक 73.15 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले झारखंड में चल रही मैपिंग प्रक्रिया में अब तक 73.15 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान हो चुका है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर की जा रही मैपिंग में राज्य के 2 करोड़ 65 लाख मतदाताओं में से 1 करोड़ 94 लाख 30 हजार 429 मतदाताओं का सत्यापन किया जा चुका है। मेरा नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, इसबार मुझे क्या करना होगा? बीएलओ आपके घर आएंगे। उन्हें आवश्यक प्रमाण दिखाकर गणना पत्र भर कर दे दें। क्या गणना पत्र भरना जरूरी है? हां। सभी मतदाताओं के लिए गणना पत्र भरना अनिवार्य है। जिनकी मैपिंग हो चुकी है और जिनकी नहीं हुई है, दोनों के घर बीएलओ जाएंगे और गणना पत्र देंगे। इसमें नागरिकता से जुड़ी जानकारी भरनी होगी। मैंने मैपिंग करा ली है, अब क्या होगा? यदि आपकी मैपिंग हो चुकी है, तो कोई दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें 12 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। मेरा नाम सूची में नहीं है, क्या करूं? यदि आपके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, तो उसका प्रमाण देकर गणना पत्र भर सकते हैं। SIR में कौन से दस्तावेज देने होंगे? निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (ईपिक) संख्या के साथ सगे-संबंधियों के नाम और उनकी ईपिक संख्या की जानकारी देनी होगी। साथ ही आधार कार्ड नंबर, बैंक पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या मान्य पहचान पत्र से जानकारी दी जा सकती है। नागरिकता का क्या है मानदंड? 28 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाले भारतीय नागरिक माने जाएंगे। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म लेने वालों के लिए माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वालों के माता-पिता दोनों का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
झारखंड में SIR… बिना नोटिस-सुनवाई नहीं कटेगा एक भी वोटर का नाम
झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत से पहले गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने मीडिया से कहा कि ‘नो नोटिस, नो डिलीशन’ नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा। घर-घर सर्वेक्षण के दौरान यदि मतदाता अपने पते पर नहीं मिलता है, तो बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) उसे तुरंत मृत या स्थानांतरित नहीं मान सकते। बीएलओ को अलग-अलग दिन और तीन बार संबंधित घर जाना होगा। ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता वहां नहीं रह रहा है। बीएलओ को अपनी रिपोर्ट में तीनों दौरों की तारीख और समय दर्ज करना अनिवार्य होगा। यदि बीएलओ किसी मतदाता को मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित चिह्नित करता है, तो निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) संबंधित मतदाता को नोटिस भेजेंगे। -शेष पेज 9 पर 23 मई को सभी मतदान केंद्रों पर प्रकाशित होगी अनमैप्ड की सूची 23 मई को सभी मतदान केंद्रों पर अनमैप्ड वोटरों की सूची प्रकाशित की जाएगी। इसमें बीएलओ के नाम और मोबाइल नंबर भी होंगे। एक भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से न छूटे, इसी लक्ष्य के साथ अभियान चलाया जा रहा है। तैयारी और प्रशिक्षण : 20 जून से 29 जून घर-घर सत्यापन : 30 जून से 29 जुलाई प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन : 5 अगस्त दावा व आपत्ति अवधि : 5 अगस्त से 4 सितंबर दावा-आपत्ति का निपटारा : 3 अक्टूबर तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन : 7 अक्टूबर अब तक 73.15 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले झारखंड में चल रही मैपिंग प्रक्रिया में अब तक 73.15 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान हो चुका है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर की जा रही मैपिंग में राज्य के 2 करोड़ 65 लाख मतदाताओं में से 1 करोड़ 94 लाख 30 हजार 429 मतदाताओं का सत्यापन किया जा चुका है। मेरा नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, इसबार मुझे क्या करना होगा? बीएलओ आपके घर आएंगे। उन्हें आवश्यक प्रमाण दिखाकर गणना पत्र भर कर दे दें। क्या गणना पत्र भरना जरूरी है? हां। सभी मतदाताओं के लिए गणना पत्र भरना अनिवार्य है। जिनकी मैपिंग हो चुकी है और जिनकी नहीं हुई है, दोनों के घर बीएलओ जाएंगे और गणना पत्र देंगे। इसमें नागरिकता से जुड़ी जानकारी भरनी होगी। मैंने मैपिंग करा ली है, अब क्या होगा? यदि आपकी मैपिंग हो चुकी है, तो कोई दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें 12 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। मेरा नाम सूची में नहीं है, क्या करूं? यदि आपके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, तो उसका प्रमाण देकर गणना पत्र भर सकते हैं। SIR में कौन से दस्तावेज देने होंगे? निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (ईपिक) संख्या के साथ सगे-संबंधियों के नाम और उनकी ईपिक संख्या की जानकारी देनी होगी। साथ ही आधार कार्ड नंबर, बैंक पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या मान्य पहचान पत्र से जानकारी दी जा सकती है। नागरिकता का क्या है मानदंड? 28 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाले भारतीय नागरिक माने जाएंगे। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म लेने वालों के लिए माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वालों के माता-पिता दोनों का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।


