Monday, May 25, 2026

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नालंदा से बोधगया-जहानाबाद का सफर होगा आसान:तीन नई रेल परियोजनाओं पर शुरू होगा काम; पांच हॉल्ट भी बनेंगे


नालंदा और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक सौगात सामने आई है। रेल मंत्रालय ने बौद्ध और जैन सर्किट को आपस में एकीकृत करने और स्थानीय व्यापार को रफ्तार देने के लिए तीन अति-महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। अच्छी बात यह है कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में रेलवे ने इन तीनों महत्वाकांक्षी योजनाओं के सर्वे की अनुमति देने के साथ-साथ इस साल खर्च करने के लिए आवश्यक फंड की भी व्यवस्था कर दी है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार ठीक-ठाक रहा, तो जल्द ही जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से नवादा, बिहारशरीफ से एकंगरसराय के रास्ते जहानाबाद और इस्लामपुर से मानपुर के रास्ते बोधगया तक रेल चलने लगेगी। इन तीनों रेल लाइनों के पूरी तरह अस्तित्व में आने के बाद पूरे क्षेत्र में रेलवे का एक बेहद मजबूत और आधुनिक नेटवर्क तैयार हो जाएगा, जो इस इलाके की तस्वीर बदल देगा। परियोजना की लंबाई 34 किलोमीटर होगी इस पूरी योजना की पहली और महत्वपूर्ण कड़ी पावापुरी-नवादा रेल परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई 34 किलोमीटर होगी। इस परियोजना का ड्रोन और गूगल अर्थ सर्वे पूरा होने के बाद रेल मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है और अब धरातल पर काम भी शुरू हो गया है। चालू वित्तीय वर्ष के बजट में इस परियोजना के लिए 492.14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। यह नई रेल लाइन नवादा को सीधे पावापुरी और राजगीर से जोड़ेगी, जिससे भगवान महावीर की निर्वाण भूमि पावापुरी आने वाले जैन और बौद्ध सर्किट के श्रद्धालुओं को सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इस मार्ग पर तीन मुख्य स्टेशनों के साथ दो बड़े और सत्रह छोटे पुल बनाए जाने की योजना है। इसी कड़ी में दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना इस्लामपुर-बोधगया वाया मानपुर रेल लाइन है, जो नालंदा को गया और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया से सीधे जोड़ेगी। लगभग 50 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 1000 करोड़ रुपये तय की गई है। इस योजना के शुरुआती ट्रैफिक और अंतिम एलाइनमेंट सर्वे के लिए बजट में विशेष टोकन राशि और प्रशासनिक फंड जारी कर दिए गए हैं। इस रेलखंड के बन जाने से बोधगया और नालंदा के बीच की रेल दूरी 20 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इस रूट पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने की योजना है, जिसके लिए मार्ग में आठ स्टेशन और चार हॉल्ट प्रस्तावित किए गए हैं। बिहारशरीफ को जहानाबाद से सीधे जोड़ेगी तीसरी बड़ी सौगात बिहारशरीफ-जहानाबाद वाया एकंगरसराय रेल लाइन के रूप में सामने आई है, जो बिहारशरीफ को गया-पटना रेल रूट पर स्थित जहानाबाद से सीधे जोड़ेगी। इस 65 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का सर्वे अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विस्तृत प्रारंभिक इंजीनियरिंग और ट्रैफिक सर्वे के लिए इस वित्तीय वर्ष में बजटीय प्रावधान किए गए हैं और इस पूरी परियोजना पर भी 1000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। सर्वे एजेंसी के मुताबिक, इस रूट पर बिहारशरीफ, एकंगरसराय और जहानाबाद के रूप में तीन बड़े जंक्शन, एक क्रॉसिंग स्टेशन और पांच हॉल्ट बनाए जाएंगे। इसकी फाइनल डीपीआर (DPR) जल्द ही रेलवे बोर्ड को सौंपी जाने वाली है। सुरक्षा और सुगमता के लिहाज से इस पूरे रूट की सबसे खास बात यह होगी कि इस पर एक भी रोड ओवर ब्रिज नहीं होगा। सड़क यातायात को निर्बाध रखने के लिए रेलवे द्वारा 13 रोड अंडर ब्रिज, 21 बड़े पुल और 59 छोटे पुल बनाए जाएंगे। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए गया, बोधगया, राजगीर, पावापुरी और बिहारशरीफ का सफर बेहद सुलभ और किफायती हो जाएगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नया आयाम मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस रेल नेटवर्क के विस्तार से कादिरगंज के पारंपरिक रेशम उद्योग और स्थानीय कृषि उत्पादों को देश भर के नए बाजार मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और रोजगार में भारी उछाल आने की पूरी उम्मीद है।

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