Tuesday, May 26, 2026

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18 हजार बच्चों के लिए 2 घंटे में खाना तैयार:दरभंगा में स्कूलों में 18 गाड़ी पहुंचा रही मिड-डे-मील, स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार


दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड स्थित धरौरा में पीएम पोषण योजना अंतर्गत संचालित केंद्रीयकृत (सेंट्रलाइज्ड) रसोई घर आज क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बन चुका है। एकता शक्ति फाउंडेशन की ओर से संचालित यह आधुनिक रसोई घर न केवल हजारों स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अत्याधुनिक तकनीक और स्वच्छता मानकों के अनुरूप प्रतिदिन बड़े पैमाने पर भोजन तैयार किया जाता है। तैयार भोजन को विशेष रूप से तैयार किए गए 18 गाड़ी के माध्यम से समय पर आसपास के सैकड़ों विद्यालयों तक पहुंचाया जाता है, जहां रोजाना 161 विद्यालयों के लगभग 18 हजार बच्चे गर्म और ताज़ा भोजन ग्रहण करते हैं। बॉयलर से मात्र 2 घण्टे मे खाना बनकर तैयार हो जाता है। कुपोषण से लड़ाई में अहम भूमिका पीएम पोषण योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को कुपोषण से बचाना और उन्हें संतुलित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। धरौरा स्थित यह केंद्रीयकृत रसोई घर इस उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर रहा है। एक ही स्थान पर वैज्ञानिक तरीके से भोजन तैयार होने से भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण स्तर का विशेष ध्यान रखा जाता है। रसोई घर में साफ-सफाई के साथ भोजन तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे बच्चों को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिल सके। भोजन तैयार करने से लेकर पैकिंग और वितरण तक हर चरण की निगरानी की जाती है। शिक्षा से जोड़ने में मिल रही सफलता स्थानीय लोगों और शिक्षकों का कहना है कि इस व्यवस्था का सकारात्मक असर विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति पर भी देखने को मिल रहा है। नियमित रूप से स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन मिलने से बच्चों का विद्यालय आने का उत्साह बढ़ा है। इससे ड्रॉपआउट दर कम करने और बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने में मदद मिल रही है। महिलाओं को मिल रहा रोजगार इस केंद्रीयकृत रसोई घर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। यहां कार्यरत महिलाओं को रोजाना लगभग 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। रसोई में काम करने वाली महिलाओं ने बताया कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और वे इस काम से काफी खुश हैं। महिलाओं का कहना है कि इस रोजगार से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें समाज में सम्मान भी मिला है। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। आधुनिक व्यवस्था बनी आकर्षण का केंद्र धरौरा का यह आधुनिक केंद्रीयकृत किचन अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़े पैमाने पर व्यवस्थित तरीके से भोजन तैयार करने और समय पर वितरण की व्यवस्था लोगों को आकर्षित कर रही है। स्थानीय प्रशासन एवं शिक्षा विभाग भी इस मॉडल को पीएम पोषण योजना के प्रभावी संचालन का बेहतर उदाहरण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार की आधुनिक व्यवस्थाओं का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी किया जाए, तो बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पीएम पोषण अभियान के प्रभारी संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि बेनीपुर प्रखंड के कुल 164 सरकारी स्कूल- जिनमें प्राथमिक और मध्य विद्यालय शामिल हैं।इसी केंद्रीयकृत रसोई घर से भोजन तैयार कर भेजा जाता है। रसोई घर में आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाता है। आलू छीलने से लेकर सब्जी काटने तक का काम मशीनों के माध्यम से होता है। भोजन बड़े बॉयलर में स्वच्छ तरीके से तैयार किया जाता है, जिससे गुणवत्ता और समय दोनों का विशेष ध्यान रखा जा सके। संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि पीएम पोषण योजना के निर्धारित मीनू के अनुसार रोजाना अलग-अलग प्रकार का भोजन बच्चों को उपलब्ध कराया जाता है। सोमवार- हरी सब्जी के साथ तड़का और चावल
मंगलवार- सोयाबड़ी-आलू की सब्जी और चावल
बुधवार- लाल चना का छोला और चावल
गुरुवार- हरी सब्जी के साथ तड़का और चावल
शुक्रवार- लाल चना का छोला,
चावल और अंडा दिया जाता है।
जो बच्चे अंडा नहीं खाते हैं, उन्हें फल उपलब्ध कराया जाता है।
शनिवार को खिचड़ी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रसोई घर में 12 महिलाएं और 15 रसोइया कार्यरत हैं।

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