मनिका| सिंजो पंचायत के बांड़ी गांव में बुधवार सुबह 4:00 बजे अवैध बालू लदा तेज रफ्तार ट्रैक्टर सुदेश्वर सिंह के घर में जा घुसा। ट्रैक्टर की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह अनियंत्रित होकर सीधे घर की छप्पर पर चढ़ गया। जिससे घर का मुख्य गेट, छप्पर और दो कमरे क्षतिग्रस्त हो गए। जिस समय घटना हुई उस समय परिवार के लोग घर के भीतर ही सो रहे थे, लेकिन किसी को कुछ नहीं हुआ। घर मालिक और गांव के लोगों ने बताया कि औरंगा नदी के जमुना घाट से हर रात 10 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक अवैध बालू का उठाव किया जाता है। इसके बाद ट्रैक्टरों से ढुलाई होती है। ट्रैक्टर चालकों में ज्यादा से ज्यादा ट्रिप मारने की होड़ रहती है। ऐसे में ट्रैक्टर रात भर बांड़ी रोड पर तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हैं। भास्कर न्यूज | लातेहार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जिले में आवास निर्माण की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकारी आंकड़ों में हजारों गरीब परिवारों को पक्का घर देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लाभुकों के घर आज भी अधूरे हैं। निर्माण की धीमी रफ्तार के पीछे प्रशासनिक निगरानी की कमी के साथ बढ़ती महंगाई और अपर्याप्त आवास राशि को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रथम फेज में वित्तीय वर्ष 2016-22 के बीच जिले में 57,952 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 57,288 आवास पूर्ण कर लिए गए हैं, जबकि 672 आवास अधूरे हैं। चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आवासों को पूरा नहीं किया गया। दूसरे फेज में वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले को 6126 नए आवासों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन अब तक केवल 1344 आवास ही पूर्ण हो सके हैं। यानी 4782 आवास लगभग दो वर्षों से अधूरे पड़े हैं। दोनों फेज मिलाकर जिले में 5454 आवास अब भी अधूरे हैं। लाभुकों ने कहा-1.20 लाख रुपए में आवास का निर्माण संभव नहीं है लाभुकों का कहना है कि वर्तमान समय में 1 लाख 20 हजार रुपए में पक्का मकान बनाना संभव नहीं है। सीमेंट, सरिया, बालू और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ चुकी है। ऐसे में गरीब परिवार पहली और दूसरी किस्त की राशि से किसी तरह दीवार खड़ा कर लेते हैं। लेकिन ढलाई अधूरी रह जाती है। तरवाड़ीह के लाभुक रिंकी देवी, लखन बिरहोर, लालो देवी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गाय शेड योजना में लाभुकों को करीब दो लाख रुपये तक की राशि दी जा रही है, जबकि उसमें ढलाई की अनिवार्यता भी नहीं है और एसबेस्टस शीट लगाना है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना में कम राशि मिलने से गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
घर के छप्पर पर चढ़ा तेज रफ्तार ट्रैक्टर, दो कमरे हो गए क्षतिग्रस्त
मनिका| सिंजो पंचायत के बांड़ी गांव में बुधवार सुबह 4:00 बजे अवैध बालू लदा तेज रफ्तार ट्रैक्टर सुदेश्वर सिंह के घर में जा घुसा। ट्रैक्टर की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह अनियंत्रित होकर सीधे घर की छप्पर पर चढ़ गया। जिससे घर का मुख्य गेट, छप्पर और दो कमरे क्षतिग्रस्त हो गए। जिस समय घटना हुई उस समय परिवार के लोग घर के भीतर ही सो रहे थे, लेकिन किसी को कुछ नहीं हुआ। घर मालिक और गांव के लोगों ने बताया कि औरंगा नदी के जमुना घाट से हर रात 10 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक अवैध बालू का उठाव किया जाता है। इसके बाद ट्रैक्टरों से ढुलाई होती है। ट्रैक्टर चालकों में ज्यादा से ज्यादा ट्रिप मारने की होड़ रहती है। ऐसे में ट्रैक्टर रात भर बांड़ी रोड पर तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हैं। भास्कर न्यूज | लातेहार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जिले में आवास निर्माण की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकारी आंकड़ों में हजारों गरीब परिवारों को पक्का घर देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लाभुकों के घर आज भी अधूरे हैं। निर्माण की धीमी रफ्तार के पीछे प्रशासनिक निगरानी की कमी के साथ बढ़ती महंगाई और अपर्याप्त आवास राशि को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रथम फेज में वित्तीय वर्ष 2016-22 के बीच जिले में 57,952 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 57,288 आवास पूर्ण कर लिए गए हैं, जबकि 672 आवास अधूरे हैं। चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आवासों को पूरा नहीं किया गया। दूसरे फेज में वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले को 6126 नए आवासों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन अब तक केवल 1344 आवास ही पूर्ण हो सके हैं। यानी 4782 आवास लगभग दो वर्षों से अधूरे पड़े हैं। दोनों फेज मिलाकर जिले में 5454 आवास अब भी अधूरे हैं। लाभुकों ने कहा-1.20 लाख रुपए में आवास का निर्माण संभव नहीं है लाभुकों का कहना है कि वर्तमान समय में 1 लाख 20 हजार रुपए में पक्का मकान बनाना संभव नहीं है। सीमेंट, सरिया, बालू और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ चुकी है। ऐसे में गरीब परिवार पहली और दूसरी किस्त की राशि से किसी तरह दीवार खड़ा कर लेते हैं। लेकिन ढलाई अधूरी रह जाती है। तरवाड़ीह के लाभुक रिंकी देवी, लखन बिरहोर, लालो देवी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गाय शेड योजना में लाभुकों को करीब दो लाख रुपये तक की राशि दी जा रही है, जबकि उसमें ढलाई की अनिवार्यता भी नहीं है और एसबेस्टस शीट लगाना है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना में कम राशि मिलने से गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

