झारखंड में इस बार की भीषण गर्मी ने बिजली खपत का 26 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राज्य गठन के बाद पहली बार बिजली की मांग 3100 मेगावाट के पार पहुंच गई। पहले गर्मी के दिनों में राज्य की अधिकतम मांग 2600 से 2700 मेगावाट के बीच रहती थी, लेकिन इस बार यह रिकॉर्ड टूट गया। 19 मई से लगातार बढ़ी डिमांड ने मानो जेबीवीएनएल की परीक्षा ले ली हो। रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग और पलामू जैसे शहरों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ी। रांची में सामान्य दिनों में बिजली की अधिकतम खपत करीब 300 से 310 मेगावाट रहती थी। पर इस बार यह बढ़कर 454 मेगावाट तक पहुंच गई। हालांकि राहत की बात यह है कि राज्य में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है और विभिन्न उत्पादन केंद्रों से लेकर सेंट्रल पूल से भी पूरी आपूर्ति मिल रही है। इसके बावजूद आम लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है, क्योंकि शहरों में “लोकल फॉल्ट” के नाम पर लगातार अनचाहे पावर कट जारी हैं। शहर के कई इलाकों में ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहे हैं। कहीं फ्यूज उड़ रहे हैं तो कहीं 11 केवी लाइन में फॉल्ट आ रहा है। नतीजा यह है कि बिना शेड्यूल के बिजली कटौती बढ़ गई है। बुधवार को मौसम सुहाना होने और कई इलाकों में बारिश होने के कारण बिजली मांग में करीब 80 मेगावाट की गिरावट भी दर्ज की गई। बिजली की कमी नहीं, सिस्टम पड़ रहा कमजोर
विभाग के अनुसार राज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है। विभिन्न स्रोतों से कुल 3167 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो रही है, जो वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। राज्य को यहां से बिजली
कंपनी मेगावाट डीवीसी 650-700 टीवीएनएल 315 सिकिदिरी हाइडल पावर 30 सीपीपी 13 सेंट्रल पूल 1272 आधुनिक पावर प्लांट 182 पतरातू पावर प्लांट 682 खपत बढ़ने से दबाव बढ़ा है…
क्यों बढ़ रही बिजली की खपत भीषण गर्मी के कारण घरों से लेकर बाजार तक एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। मॉल, होटल, रेस्तरां और बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में सामान्य दिनों की तुलना में बिजली खपत कई गुना बढ़ गई है। गैस की किल्लत के कारण लोग इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल भी अधिक कर रहे हैं। राज्य की अपनी बिजली उत्पादन इकाई टीवीएनएल इस बार बढ़ी मांग के बीच बड़ी भूमिका निभा रही है। इसकी दोनों यूनिट लगातार बिजली उत्पादन कर रही हैं और राज्य को करीब 315 मेगावाट बिजली उपलब्ध करा रही हैं। टीवीएनएल की दोनों यूनिट से लगातार उत्पादन धनबाद और जमशेदपुर में भी रिकॉर्ड खपत : धनबाद में बिजली खपत करीब 450 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि जमशेदपुर में करीब 350 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। जमशेदपुर के टाटा कंपनी क्षेत्र में टाटा पावर द्वारा अलग से बिजली आपूर्ति की जाती है, इसके बावजूद शहर में डिमांड लगातार बढ़ रही है।


