कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया शहर में एक वृद्ध दंपती ने अपने घर की छत को 1000 वर्ग फीट के सुंदर गार्डन में बदल दिया है। विजय कुमार और सरिता विजय नामक इस दंपती ने अपनी छत पर 100 से अधिक किस्मों के फूल, फल और सब्जियां लगाई हैं, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। जेपी नगर निवासी इस दंपती ने अपनी छत पर लगभग 1000 गमलों में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए हैं। इन पौधों में गुलाब, एस्टर, पैंजी, गेंदा, गुलदाउदी, कोचिया, बोगनविलिया, जैस्मिन और डेजी जैसे कई फूल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियां भी उगाई हैं। बढ़ते प्रदूषण और बीमारियों के दौर में, यह दंपती अपने आसपास स्वच्छ और सुंदर वातावरण बनाए रखने में विश्वास रखता है। उनका मानना है कि रंग-बिरंगे फूल-पौधे और हरियाली न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं। 1970 से है यह शौक
विजय कुमार ने बताया कि सन 1970 में उनके पिताजी ने यह मकान बनाया था। वे जब से इस घर में आए तभी से उन्हें बागवानी का शौक जाग गया था। पहले वे घर के निचले हिस्से की खाली भूमि पर ही बागवानी करते थे और पेड़, पौधे और फूल लगाया करते थे। 1990 में इनके बाग से कुछ गमले चोरी हो गए। इसके बाद इन्हें ऐसा लगा जैसे कि इनके परिवार के कोई सदस्य लापता हो गए हों। इसके बाद उन्होंने अपने घर की छत को ही गार्डन में तब्दील करने की ठानी। और देखते ही देखते इन्होंने अपने लगन और मेहनत से अपने छत को एक बेहतरीन गार्डन में तब्दील कर दिया। नकारात्मक ऊर्जा होती है समाप्त
विजय कुमार और उनकी पत्नी सरिता विजय बताते हैं कि गार्डन लगाने से न केवल उनके घर की सुंदरता बढ़ी है, बल्कि उनके अंदर से नकारात्मक ऊर्जा का अंत और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसका लाभ न केवल उन्हें बल्कि उनके इर्द गिर्द रहने वाले लोगों को भी मिलता है। पेड़-पौधों को ही बच्चों की तरह पालते हैं
विजय कुमार ने बताया कि उनकी दो पुत्री और एक पुत्र हैं। एक पुत्री का विवाह हो चुका है और वह अपने पति के साथ अमरीका में रहती है। वहीं, एक अन्य पुत्री महाराष्ट्र के मुम्बई में एक बैंक में कार्यरत हैं। जबकि इनका इकलौता पुत्र डॉक्टर है और फिलहाल रांची के रिम्स में पीजी की पढ़ाई कर रहा है। सभी बेटे-बेटियों के घर से दूर रहने के कारण इन्होंने अपने बाग में लगे पौधों से ही बच्चों जैसा व्यवहार और प्यार करना शुरू कर दिया है। ये उनकी देखभाल ठीक उस प्रकार करते हैं, जैसे एक पिता अपने पुत्र का। प्लास्टिक के डिब्बे और प्लास्टिक को बना रखा है गमला
इधर, विजय कुमार की पत्नी सरिता विजय ने कहा कि उन्होंने भी अपने पति के इस शौक को अपना लिया है। वे उनके इस शौक में लगातार सहयोग करती हैं। वे इसके लिए घर में जो भी सामान प्लास्टिक के डिब्बे या पॉलिथीन में आते हैं, उसे फेंकने के बजाय गमले में तब्दील कर लेती हैं और उसमें नए पौधे लगा देती हैं। गर्मियों में कैसे करें देखभाल
विजय कुमार ने कहा कि उनके गार्डन में लगे पौधों को इस चिलचिलाती गर्मी में विशेष सेवा की जरूरत पड़ती है। इसके लिए वे इन पौधों में नियमित सुबह और शाम पानी डालते हैं ताकि इनके पत्ते सुख न पाएं। इसके अतिरिक्त वे इनमें समय-समय पर खाद्द डालते रहते हैं ताकि इनका नियमित विकास होता रहे। इसके अलावे जिन पौधों के कुछ पत्ते सुख जाते हैं, उन्हें ये तुरंत तोड़कर हटा देते हैं।


