रिम्स में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अब कैश की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने वाली है। दैनिक भास्कर द्वारा रिम्स में डिजिटल भुगतान सुविधा नहीं होने और परिसर में एटीएम तक नहीं रहने की समस्या प्रमुखता से उठाए जाने के बाद रिम्स प्रशासन ने पहल करते हुए विभिन्न बिलिंग काउंटरों पर पीओएस मशीनें स्थापित कर दी हैं। अब मरीज और उनके परिजन क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे। फिलहाल चार पीओएस मशीनें अलग-अलग बिलिंग काउंटरों पर लगाई गई हैं। आने वाले दिनों में सभी काउंटरों पर यह सुविधा शुरू करने की तैयारी है। दरअसल, अब तक रिम्स में अधिकांश भुगतान केवल नकद लिए जाते थे। अस्पताल परिसर में एक भी एटीएम नहीं होने के कारण मरीजों के परिजनों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जाकर कैश निकालना पड़ता था। गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी इसी वजह से होती थी। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में यह मुद्दा उठाया था कि इमरजेंसी और ओपीडी में इलाज कराने आने वाले कई लोग डिजिटल भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन सुविधा नहीं होने से उन्हें मजबूरी में नकद की व्यवस्था करनी पड़ती है। बैंक ने दिया प्रशिक्षण नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों द्वारा बिलिंग काउंटरों पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। रिम्स प्रबंधन का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से भुगतान प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक सुविधाजनक होगी।
रिम्स में बिलिंग काउंटरों पर लगीं पीओएस मशीनें, कार्ड व यूपीआई से हो सकेगा पेमेंट
रिम्स में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अब कैश की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने वाली है। दैनिक भास्कर द्वारा रिम्स में डिजिटल भुगतान सुविधा नहीं होने और परिसर में एटीएम तक नहीं रहने की समस्या प्रमुखता से उठाए जाने के बाद रिम्स प्रशासन ने पहल करते हुए विभिन्न बिलिंग काउंटरों पर पीओएस मशीनें स्थापित कर दी हैं। अब मरीज और उनके परिजन क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे। फिलहाल चार पीओएस मशीनें अलग-अलग बिलिंग काउंटरों पर लगाई गई हैं। आने वाले दिनों में सभी काउंटरों पर यह सुविधा शुरू करने की तैयारी है। दरअसल, अब तक रिम्स में अधिकांश भुगतान केवल नकद लिए जाते थे। अस्पताल परिसर में एक भी एटीएम नहीं होने के कारण मरीजों के परिजनों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जाकर कैश निकालना पड़ता था। गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी इसी वजह से होती थी। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में यह मुद्दा उठाया था कि इमरजेंसी और ओपीडी में इलाज कराने आने वाले कई लोग डिजिटल भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन सुविधा नहीं होने से उन्हें मजबूरी में नकद की व्यवस्था करनी पड़ती है। बैंक ने दिया प्रशिक्षण नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों द्वारा बिलिंग काउंटरों पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। रिम्स प्रबंधन का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से भुगतान प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक सुविधाजनक होगी।


