Monday, June 1, 2026

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दो दोस्त जगा रहे शिक्षा की अलख… रात में बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रहे


भास्कर न्यूज|गुमला जिला मुख्यालय से नौ किमी दूर स्थित खोरा पंचायत के कठियाटोली गांव में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने व गांव को नशामुक्त बनाने के लिए दो दोस्तों ने बीड़ा उठाकर मिसाल कायम की है। गांव के बच्चों को स्कूली शिक्षा के अलावे अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से सौ वॉट के सोलर सिस्टम से रात्रि में स्टेट लाइब्रेरी खोल कर नि:शुल्क शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। यह काम गांव के ही बंसत लकड़ा द्वारा किया जा रहा है। बंसत ने बताया कि वह स्वयं और उसका एक दोस्त विकास मिंज दोनों साथ में संत पात्रिक स्कूल से मैट्रिक और इंटर पास कर सरकारी सेवा में जाने के लिए तैयारी प्रारंभ कर दिया था। इसी दौरान विकास का नौकरी सीसीएल कंपनी में हो गया। वह नौकरी करने के लिए चला गया। जब वह 6 माह नौकरी कर लौटा, तो गांव के स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में ठीक करने का ठान लिया। सर्वप्रथम हम दोनों ने एक साल पहले शराब को पूर्ण रूप से बंद कराया। आदिवासी बहुल इलाका होने के बावजूद गांव के लोग किसी प्रकार के शादी व अन्य उत्सव में नशा का सेवन नहीं करते है। न शराब बनता है। इसके बाद बगीचा में अपने निजी जमीन पर अपने पैसों से एक कमरे का निर्माण कराया और सोलर सिस्टम खरीद अपने दोस्त बंसत से कहा कि यहां प्रत्येक दिन रात्रि में शिक्षा देने का काम करें। इससे बच्चों के अंदर पढ़ाई करने का आदत हो जाएगी और विगत 11 माह से लगातार गांव में शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। लाइब्रेरी में कुल 35 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। विकास मिंज ने बताया कि छोटा गांव होने के कारण यह गांव विक​िसत नही हुआ था। हमने सोचा कि बच्चें दिनभर इधर-उधर भटकते रहते है। गांव विकास से कोसो दूर है। इसलिए गांव के लोगों से सहमति लेकर रात्रि स्टेट लाइब्रेरी प्रारंभ करने की ठानी। कक्षा पांचवी से लेकर कक्षा दसवीं तक की हर किताब लाइब्रेरी में उपलब्ध है। स्वयं अपने पैसों से खरीदा हूं और अपने दोस्त के मदद से शिक्षा देने का काम कर रहा हूं। जब भी छुट्टी आता हूं, तो मै भी बच्चों को शिक्षा देने में जुट जाता हूं। शिक्षक बंसत लकड़ा ने बताया कि अपने दोस्त के मदद से वह गांव में शिक्षा देने का काम कर रहा है। वर्ष 2026 में दो अभ्यर्थी ने मैट्रिक का परीक्षा दी थी। जिसमें संत पात्रिक स्कूल से नेहा उरांव थी। जो 91 प्रतिशत अंक लाकर स्कूल के साथ-साथ गांव का भी नाम रौशन की है। वही जतराटाना भगत के सुखनाथ उरांव ने 60 प्रतिशत अंक लाकर गांव क नाम रौशन किया है। उन्होंने बताया कि वह दिन भर मजदूरी का काम करता है और रात में सात से साढ़े नौ बजे तक शिक्षा देने का काम करता है।

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