शहर को संवारने और नदी-नालों को अतिक्रमण मुक्त करने के मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निगम-प्रशासन और पुलिस महकमा रेस हो गया है। पिछले तीन दिनों से नगर आयुक्त, एसएसपी, ट्रैफिक एसपी सहित अन्य अफसर सड़कों पर उतर कर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं। कहीं सख्ती हो रही है तो कहीं समझाया जा रहा। लेकिन नदी-नालों को अतिक्रमण मुक्त कराने में निगम-प्रशासन रेस हो गया है। पंचशील नगर में नाले का अतिक्रमण करके बने 23 घरों को नगर निगम ने नोटिस करके भवन का नक्शा जमा करने का निर्देश दिया है। वहीं, दूसरी ओर हेहल अंचल की ओर से नक्शा से नाली का मिलान किया गया तो चौंकाने वाली बात सामने आई। चार भवन नाले के ऊपर मिले। वहीं, दो भवनों का कुछ हिस्सा अतिक्रमण में पाया गया। इसके बाद हेहल सीओ ने उक्त अतिक्रमण को हटाने के लिए निगम के इंजीनियरों से सुझाव मांगा है। वहीं, सदर एसडीओ को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने के लिए मजिस्ट्रेट और फोर्स की मांग की गई है। दूसरी ओर मंगलवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने हरमू नदी की स्थिति का जायजा लिया। विद्यानगर से हिंदपीढ़ी क्षेत्र में नदी के किनारे चल रहे अवैध खटाल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान सहित अन्य संरचना को देख उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने निगम के पदाधिकारियों को कहा कि तत्काल इस क्षेत्र में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाएं और जुर्माना भी वसूलें। शहर अंचल और अरगोड़ा अंचल के साथ संयुक्त रूप से हरमू नदी की मापी करके रिपोर्ट दें, ताकि पता चले कि नदी के वास्तविक क्षेत्र में कहां-कहां अतिक्रमण है। हालांकि, इस दौरान एक सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब नदी-नालों का अतिक्रमण हो रहा था, तब निगम-प्रशासन ने उसे रोकने के लिए क्यों ठोस कदम नहीं उठाया। 85 करोड़ खर्च करने के बाद भी हरमू नदी नाला बन गई, सीवेज-ड्रेनेज का मलबा जमा हरमू नदी का जीर्णोद्धार करीब 85 करोड़ रुपए की लागत से कराया गया है। लेकिन, नदी के डीपीआर में इतनी खामियां थीं कि 85 करोड़ खर्च करने के बाद भी हरमू नदी नहीं बन सकी। यह नाला बनकर रह गई। क्योंकि, नदी के किनारे स्थित घरों के सीवेज और ड्रेनेज की गंदगी सीधे हरमू नदी में जा रही है। करम चौक से चुटिया की अमरावती कॉलोनी तक नदी के 10 किमी क्षेत्र में सीवरेज-ड्रेनेज का मलबा जमा है। नदी के किनारे इतनी अधिक दुर्गंध है कि लोगों को नाक बंद करके गुजरना पड़ रहा है। दरअसल, नदी के किनारे करीब 21 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना था, लेकिन डीपीआर में 82 नालों से आने वाले पानी को ट्रैप करने के बजाय मात्र 6 नालों से आने वाले पानी को ट्रैप करने का प्लान बनाया गया। इस वजह से मात्र 10 एमएलडी क्षमता के सात एसटीपी ही बने। इस वजह से आज तक हरमू नदी प्रदूषित ही है।
हरमू नदी की फिर होगी मापी:पंचशील नगर में घर के बीच से गुजर रहा नाला, 6 मकानों को तोड़ने का नोटिस
शहर को संवारने और नदी-नालों को अतिक्रमण मुक्त करने के मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निगम-प्रशासन और पुलिस महकमा रेस हो गया है। पिछले तीन दिनों से नगर आयुक्त, एसएसपी, ट्रैफिक एसपी सहित अन्य अफसर सड़कों पर उतर कर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं। कहीं सख्ती हो रही है तो कहीं समझाया जा रहा। लेकिन नदी-नालों को अतिक्रमण मुक्त कराने में निगम-प्रशासन रेस हो गया है। पंचशील नगर में नाले का अतिक्रमण करके बने 23 घरों को नगर निगम ने नोटिस करके भवन का नक्शा जमा करने का निर्देश दिया है। वहीं, दूसरी ओर हेहल अंचल की ओर से नक्शा से नाली का मिलान किया गया तो चौंकाने वाली बात सामने आई। चार भवन नाले के ऊपर मिले। वहीं, दो भवनों का कुछ हिस्सा अतिक्रमण में पाया गया। इसके बाद हेहल सीओ ने उक्त अतिक्रमण को हटाने के लिए निगम के इंजीनियरों से सुझाव मांगा है। वहीं, सदर एसडीओ को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने के लिए मजिस्ट्रेट और फोर्स की मांग की गई है। दूसरी ओर मंगलवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने हरमू नदी की स्थिति का जायजा लिया। विद्यानगर से हिंदपीढ़ी क्षेत्र में नदी के किनारे चल रहे अवैध खटाल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान सहित अन्य संरचना को देख उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने निगम के पदाधिकारियों को कहा कि तत्काल इस क्षेत्र में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाएं और जुर्माना भी वसूलें। शहर अंचल और अरगोड़ा अंचल के साथ संयुक्त रूप से हरमू नदी की मापी करके रिपोर्ट दें, ताकि पता चले कि नदी के वास्तविक क्षेत्र में कहां-कहां अतिक्रमण है। हालांकि, इस दौरान एक सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब नदी-नालों का अतिक्रमण हो रहा था, तब निगम-प्रशासन ने उसे रोकने के लिए क्यों ठोस कदम नहीं उठाया। 85 करोड़ खर्च करने के बाद भी हरमू नदी नाला बन गई, सीवेज-ड्रेनेज का मलबा जमा हरमू नदी का जीर्णोद्धार करीब 85 करोड़ रुपए की लागत से कराया गया है। लेकिन, नदी के डीपीआर में इतनी खामियां थीं कि 85 करोड़ खर्च करने के बाद भी हरमू नदी नहीं बन सकी। यह नाला बनकर रह गई। क्योंकि, नदी के किनारे स्थित घरों के सीवेज और ड्रेनेज की गंदगी सीधे हरमू नदी में जा रही है। करम चौक से चुटिया की अमरावती कॉलोनी तक नदी के 10 किमी क्षेत्र में सीवरेज-ड्रेनेज का मलबा जमा है। नदी के किनारे इतनी अधिक दुर्गंध है कि लोगों को नाक बंद करके गुजरना पड़ रहा है। दरअसल, नदी के किनारे करीब 21 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना था, लेकिन डीपीआर में 82 नालों से आने वाले पानी को ट्रैप करने के बजाय मात्र 6 नालों से आने वाले पानी को ट्रैप करने का प्लान बनाया गया। इस वजह से मात्र 10 एमएलडी क्षमता के सात एसटीपी ही बने। इस वजह से आज तक हरमू नदी प्रदूषित ही है।
