हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SBMCH) में मंगलवार देर रात बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। अस्पताल में करीब दो घंटे तक बिजली नहीं रही। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली गुल होने का सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिला। जहां डॉक्टरों को मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च के सहारे मरीजों का इलाज करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच अचानक बिजली कटने से वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई मरीज गर्मी और घुटन से बेचैन दिखे, जबकि परिजन व्यवस्था को लेकर नाराज नजर आए। डीजल खत्म होने से जनरेटर नहीं चला अस्पताल में बिजली बैकअप के लिए लगाए गए लाखों रुपए के सोलर पावर सिस्टम के भी पिछले कई महीनों से खराब पड़े रहने की बात सामने आई है। ऐसे में जब मुख्य बिजली आपूर्ति ठप हुई, तो बैकअप सिस्टम भी काम नहीं आया। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही तब और उजागर हुई जब जनरेटर भी नहीं चल सका। अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके सिंह ने बताया कि जनरेटर के लिए डीजल खत्म हो गया था, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में भी बिजली बहाल नहीं की जा सकी। इस घटना ने अस्पताल में आपातकालीन ईंधन स्टॉक की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। सांसद ने जताई नाराजगी, दी सख्त चेतावनी मामले की जानकारी मिलते ही हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सांसद ने यहां तक कहा कि यदि अस्पताल को डीजल की जरूरत है, तो वे खुद इसकी व्यवस्था कराने को तैयार हैं, लेकिन ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए। इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।
हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में दो घंटे कटी रही बिजली:मोबाइल टॉर्च की रोशनी में होता रहा इलाज, प्रबंधन बोला- जेनरेटर में नहीं था डीजल
हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SBMCH) में मंगलवार देर रात बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। अस्पताल में करीब दो घंटे तक बिजली नहीं रही। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली गुल होने का सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिला। जहां डॉक्टरों को मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च के सहारे मरीजों का इलाज करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच अचानक बिजली कटने से वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई मरीज गर्मी और घुटन से बेचैन दिखे, जबकि परिजन व्यवस्था को लेकर नाराज नजर आए। डीजल खत्म होने से जनरेटर नहीं चला अस्पताल में बिजली बैकअप के लिए लगाए गए लाखों रुपए के सोलर पावर सिस्टम के भी पिछले कई महीनों से खराब पड़े रहने की बात सामने आई है। ऐसे में जब मुख्य बिजली आपूर्ति ठप हुई, तो बैकअप सिस्टम भी काम नहीं आया। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही तब और उजागर हुई जब जनरेटर भी नहीं चल सका। अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके सिंह ने बताया कि जनरेटर के लिए डीजल खत्म हो गया था, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में भी बिजली बहाल नहीं की जा सकी। इस घटना ने अस्पताल में आपातकालीन ईंधन स्टॉक की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। सांसद ने जताई नाराजगी, दी सख्त चेतावनी मामले की जानकारी मिलते ही हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सांसद ने यहां तक कहा कि यदि अस्पताल को डीजल की जरूरत है, तो वे खुद इसकी व्यवस्था कराने को तैयार हैं, लेकिन ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए। इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।

