रिम्स परिसर में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। करीब 70 वर्षीय मरीज बुधराम मरांडी, जो बोकारो के रहने वाले हैं, इन दिनों रिम्स के मेडिसिन विभाग में भर्ती हैं। इलाज के दौरान उन्हें कान संबंधी समस्या की जांच के लिए ईएनटी विभाग जाने की सलाह दी गई। इसके बाद उनके दो परिजन उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाकर मेडिसिन विभाग से क्षेत्रीय नेत्र संस्थान परिसर स्थित ईएनटी विभाग की ओर ले जाते नजर आए। स्थिति यह थी कि मरीज के हाथ में स्लाइन लगी हुई थी। एक परिजन पूरे रास्ते स्लाइन की बोतल हाथ में पकड़े हुए चल रहा था, जबकि दूसरा व्हीलचेयर को धकेल रहा था। मेडिसिन विभाग से ईएनटी विभाग की दूरी करीब 400 मीटर है। जांच के लिए ले जाने और फिर वापस लाने में परिजनों को लगभग 800 मीटर तक व्हीलचेयर धकेलनी पड़ी। रिम्स प्रशासन की ओर से अक्सर यह दावा किया जाता है कि गंभीर और भर्ती मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाने के लिए वाहन या ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध है। लेकिन बुजुर्ग मरीज को इस तरह व्हीलचेयर पर ले जाने की मजबूरी इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े करती है।
हाथ में स्लाइन, मरीज को व्हील चेयर पर 400 मीटर दूर ईएनटी विभाग ले गए परिजन
रिम्स परिसर में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। करीब 70 वर्षीय मरीज बुधराम मरांडी, जो बोकारो के रहने वाले हैं, इन दिनों रिम्स के मेडिसिन विभाग में भर्ती हैं। इलाज के दौरान उन्हें कान संबंधी समस्या की जांच के लिए ईएनटी विभाग जाने की सलाह दी गई। इसके बाद उनके दो परिजन उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाकर मेडिसिन विभाग से क्षेत्रीय नेत्र संस्थान परिसर स्थित ईएनटी विभाग की ओर ले जाते नजर आए। स्थिति यह थी कि मरीज के हाथ में स्लाइन लगी हुई थी। एक परिजन पूरे रास्ते स्लाइन की बोतल हाथ में पकड़े हुए चल रहा था, जबकि दूसरा व्हीलचेयर को धकेल रहा था। मेडिसिन विभाग से ईएनटी विभाग की दूरी करीब 400 मीटर है। जांच के लिए ले जाने और फिर वापस लाने में परिजनों को लगभग 800 मीटर तक व्हीलचेयर धकेलनी पड़ी। रिम्स प्रशासन की ओर से अक्सर यह दावा किया जाता है कि गंभीर और भर्ती मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाने के लिए वाहन या ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध है। लेकिन बुजुर्ग मरीज को इस तरह व्हीलचेयर पर ले जाने की मजबूरी इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े करती है।

