वन विभाग की नई रणनीति:मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे, ड्रोन-सैटेलाइट से निगरानी; जंगल में आग रोकने को 28 हजार ‘फायर वॉरियर’ बनेंगे

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झारखंड के वनों में आग की घटनाओं को शून्य पर लाने के लक्ष्य के साथ वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। अभी तक 28 हजार ग्रामीणों को ‘फायर वॉरियर’के तौर पर एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जोड़ा गया है। इसे बढ़ाकर 50 हजार तक पहुंचाने की योजना है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की भागीदारी से इस बार जंगल की आग पर काबू पाने की रणनीति बनाई गई है। ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया जाएगा और कुछ को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। सामान्यतः फरवरी से मानसून तक वन क्षेत्र में आग लगने की आशंका रहती है। इस अवधि में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। भारत सरकार, आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करेंगे। स्कूलों में बैठकें की जा रही हैं और जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य है कि आग लगने के कारणों को खत्म करना और यदि कहीं आग लगे तो तुरंत सूचना मिल सके, ताकि नुकसान कम हो। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ग्रामीणों से सीधे जुड़ें और जिला स्तर पर एक्शन प्लान तैयार करें। पीसीसीएफ ने मंगलवार को राज्य भर के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों और वन प्रमंडल पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की। नुक्कड़ नाटक और प्रभात फेरी से जागरूकता वन क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटक और छात्रों की प्रभात फेरी आयोजित की जाएगी। जल भंडारण, अग्निशमन विभाग से समन्वय और सूचना का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा। ड्रोन और सैटेलाइट अलार्म सिस्टम का भी उपयोग होगा। हर जिले और रेंज स्तर पर 24 घंटे कार्यरत कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। मुखिया, वनवासी, छात्र और स्थानीय लोगों को मोबाइल के जरिए सूचना तंत्र से जोड़ा जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि जंगल या उसके आसपास बीड़ी-सिगरेट न पिएं और आग न जलाएं। सूखी पत्तियों की नियमित सफाई और राज्य मुख्यालय से सतत संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। फायर लाइन सक्रिय होगी
जंगलों में आग रोकने के लिए 10 से 20 मीटर चौड़ी फायर लाइन को फिर सक्रिय किया जाएगा। यह पट्टी आग को फैलने से रोकती है और बुझाने में सहायक होती है। 16% बढ़ीं घटनाएं, प. सिंहभूम सबसे ज्यादा प्रभावित हाल के वर्षों में जंगलों में आग की घटनाओं में करीब 16% की वृद्धि हुई है। मार्च-अप्रैल में स्थिति अधिक गंभीर रहती है। पश्चिमी सिंहभूम के जंगल सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। 2001 से 2025 के बीच राज्य में आग के कारण 10% से अधिक वृक्षों का नुकसान हो चुका है। वन विभाग का लक्ष्य है कि इस वर्ष सामुदायिक सहयोग से इस नुकसान को न्यूनतम किया जाए।

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