नवादा सदर अस्पताल की पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारत अब मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए चिंता का कारण बन गई है। करीब 50 साल पुरानी इस इमारत की हालत ऐसी हो गई है कि कई जगहों पर छत और दीवारों से प्लास्टर, सीमेंट और अन्य हिस्से टूटकर गिर रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। बताया जाता है कि सदर अस्पताल की यह इमारत वर्ष 1973 के आसपास बनाई गई थी। समय के साथ भवन की मजबूती लगातार कमजोर होती गई, लेकिन अब तक इसका कोई बड़ा जीर्णोद्धार नहीं कराया गया है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज, जांच और दवा के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में जर्जर भवन के बीच मरीजों का इलाज होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। एक्स-रे सेंटर के पास रहती है भीड़, बढ़ा खतरा सदर अस्पताल में एक्स-रे और जांच कराने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। कई जगहों पर मरीजों की भीड़ रहती है, लेकिन उसी जगहों पर भवन की हालत काफी खराब बताई जा रही है। मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर हिस्सों की वजह से हमेशा डर बना रहता है कि कहीं अचानक छत या दीवार का हिस्सा गिर न जाए। बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई जगहों पर छत से पानी टपकता है और दीवारों में नमी आने से वह कमजोर होती जा रही है। “बच्चे और बुजुर्ग डर के बीच बैठते हैं” स्थानीय निवासी रामनाथ सिंह ने बताया कि उन्हें हर दिन किसी न किसी काम से अस्पताल आना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में बच्चे और बुजुर्ग भी आते हैं, लेकिन भवन की हालत देखकर डर बना रहता है। उन्होंने कहा, “अगर अचानक छत का कोई हिस्सा गिर गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रशासन को समय रहते इस पर ध्यान देना चाहिए।” स्वास्थ्यकर्मियों ने भी जताई चिंता अस्पताल में काम करने वाले कई स्वास्थ्यकर्मियों ने भी भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान उन्हें भी हर समय सतर्क रहना पड़ता है। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा भी जरूरी है। जर्जर भवन में लंबे समय तक काम करना जोखिम भरा हो सकता है। तकनीकी जांच की मांग स्थानीय लोगों और मरीजों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि भवन का तकनीकी परीक्षण कराया जाए। लोगों का कहना है कि विशेषज्ञों की टीम से जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि इमारत अभी उपयोग के योग्य है या नहीं। यदि मरम्मत की जरूरत है तो समय रहते काम शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही के कारण किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अस्पताल प्रबंधन ने कहा- जल्द होंगे सुरक्षा उपाय अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य ने बताया कि भवन की स्थिति की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला अधिकारियों के संज्ञान में है और आवश्यक मरम्मत व सुरक्षा उपाय जल्द सुनिश्चित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा प्राथमिकता है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर किसी भी तरह की लापरवाही बड़ी घटना को जन्म दे सकती है।
50 साल पुरानी नवादा सदर अस्पताल की इमारत बनी खतरा:छत से गिर रहा प्लास्टर, दीवारों में दरार; मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों पर मंडरा रहा हादसे का डर
नवादा सदर अस्पताल की पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारत अब मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए चिंता का कारण बन गई है। करीब 50 साल पुरानी इस इमारत की हालत ऐसी हो गई है कि कई जगहों पर छत और दीवारों से प्लास्टर, सीमेंट और अन्य हिस्से टूटकर गिर रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। बताया जाता है कि सदर अस्पताल की यह इमारत वर्ष 1973 के आसपास बनाई गई थी। समय के साथ भवन की मजबूती लगातार कमजोर होती गई, लेकिन अब तक इसका कोई बड़ा जीर्णोद्धार नहीं कराया गया है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज, जांच और दवा के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में जर्जर भवन के बीच मरीजों का इलाज होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। एक्स-रे सेंटर के पास रहती है भीड़, बढ़ा खतरा सदर अस्पताल में एक्स-रे और जांच कराने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। कई जगहों पर मरीजों की भीड़ रहती है, लेकिन उसी जगहों पर भवन की हालत काफी खराब बताई जा रही है। मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर हिस्सों की वजह से हमेशा डर बना रहता है कि कहीं अचानक छत या दीवार का हिस्सा गिर न जाए। बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई जगहों पर छत से पानी टपकता है और दीवारों में नमी आने से वह कमजोर होती जा रही है। “बच्चे और बुजुर्ग डर के बीच बैठते हैं” स्थानीय निवासी रामनाथ सिंह ने बताया कि उन्हें हर दिन किसी न किसी काम से अस्पताल आना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में बच्चे और बुजुर्ग भी आते हैं, लेकिन भवन की हालत देखकर डर बना रहता है। उन्होंने कहा, “अगर अचानक छत का कोई हिस्सा गिर गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रशासन को समय रहते इस पर ध्यान देना चाहिए।” स्वास्थ्यकर्मियों ने भी जताई चिंता अस्पताल में काम करने वाले कई स्वास्थ्यकर्मियों ने भी भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान उन्हें भी हर समय सतर्क रहना पड़ता है। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा भी जरूरी है। जर्जर भवन में लंबे समय तक काम करना जोखिम भरा हो सकता है। तकनीकी जांच की मांग स्थानीय लोगों और मरीजों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि भवन का तकनीकी परीक्षण कराया जाए। लोगों का कहना है कि विशेषज्ञों की टीम से जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि इमारत अभी उपयोग के योग्य है या नहीं। यदि मरम्मत की जरूरत है तो समय रहते काम शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही के कारण किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अस्पताल प्रबंधन ने कहा- जल्द होंगे सुरक्षा उपाय अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य ने बताया कि भवन की स्थिति की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला अधिकारियों के संज्ञान में है और आवश्यक मरम्मत व सुरक्षा उपाय जल्द सुनिश्चित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा प्राथमिकता है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर किसी भी तरह की लापरवाही बड़ी घटना को जन्म दे सकती है।

