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रिशु श्री की कंपनियों का डमी डायरेक्टर गिरफ्तार, कहा- मेरा काम घूस पहुंचाना, बेनामी संपत्ति खरीदना


टेंडर माफिया रिशु श्री के सबसे खास राजदार और डमी डायरेक्टर संतोष कुमार को स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने शुक्रवार को मीठापुर से गिरफ्तार कर लिया है। संतोष पिछले 15 साल से रिशु श्री के काले साम्राज्य का पूरा हिसाब-किताब देख रहा था। पूछताछ के दौरान संतोष ने स्वीकार किया है कि उसका मुख्य काम अधिकारियों तक घूस पहुंचाना और बेनामी संपत्तियां खरीदना था। SVU अब संतोष को रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ करेगी। कैसे होता था काली कमाई का खेल? संतोष कुमार ने पूछताछ में भ्रष्टाचार के पूरे सिंडिकेट और काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया है: फर्जी खर्चे और नकदी (Cash) की निकासी: संतोष, रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ में फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर खर्चे दिखाता था। इस खेल के जरिए बैंक खातों से मोटी नकदी (Cash) निकाली जाती थी। रिश्वत का जरिया: इसी निकाली गई नकदी का इस्तेमाल बड़े नौकरशाहों (Bureaucrats) और सरकारी इंजीनियरों को रिश्वत देने के लिए किया जाता था। बेनामी संपत्तियां: रिशु श्री के नाम पर जितनी भी बेनामी अचल संपत्तियां खरीदी गईं, उन सभी के पीछे संतोष कुमार का ही दिमाग था। ईंधन के फर्जी बिल: रिश्वत के लिए नकदी का इंतजाम करने के लिए गाड़ियों के ईंधन (Fuel) के फर्जी बिल भी तैयार किए जाते थे। 125 करोड़ का टेंडर घोटाला और सब-कॉन्ट्रैक्ट का खेल जांच में सामने आया है कि जल संसाधन विभाग में अपने रसूख का इस्तेमाल कर 125 करोड़ रुपये का एक बड़ा टेंडर (सुपौल के बीरपुर में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर) पहले अहमदाबाद की कंपनी ‘शेवरॉक्स’ को दिलवाया गया। इसके बाद एक सोची-समझी साजिश के तहत इसे ‘सब-कॉन्ट्रैक्ट’ के जरिए रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ को ट्रांसफर करा दिया गया। संतोष इसी कंपनी में डमी डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहा था। 2010 से है रिश्ता: संतोष और रिशु श्री का संबंध साल 2010 से है, जब रिशु ने डस्टबिन सप्लाई का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे भरोसा बढ़ने पर रिशु ने संतोष को अपनी कई शेल (फर्जी) कंपनियों में डायरेक्टर बना दिया। आईएएस (IAS) संजीव हंस हैं पूरे खेल के केंद्र में SVU एफआईआर 5/25 के तहत इस मामले की कार्रवाई कर रही है। इस पूरे घोटाले के केंद्र में तत्कालीन जल संसाधन सचिव और आईएएस अधिकारी संजीव हंस हैं। कमीशन का हिसाब: सिंडिकेट का एक अन्य सदस्य पवन कुमार, अधिकारियों को दिए जाने वाले कमीशन (2% से 10% तक) का पूरा हिसाब-किताब रखता था। अति-गोपनीय दस्तावेज: मुख्य आरोपी रिशु श्री के फोन से कई अति-गोपनीय सरकारी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। महिला को चुप कराने के लिए दिए 20 लाख: आरोप है कि एक महिला को चुप रखने के लिए आईएएस संजीव हंस के कहने पर रिशु की कंपनी से ₹20 लाख ट्रांसफर किए गए थे।

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