बक्सर-वरुणा रेल ओवरब्रिज (ROB) के इटाढ़ी रोड की ओर पांचवें पिलर के ऊपर स्लैब धंसने के बाद बक्सरवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को पहले भारी वाहनों और फिर छोटे वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई गई थी, जबकि शनिवार को पुल पर मिट्टी गिराकर सभी प्रकार के वाहनों के लिए मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया। दूसरी ओर जिला प्रशासन की ओर से इटाढ़ी रोड स्थित रेलवे फाटक को खोलकर लोगों को राहत देने का दावा किया जा रहा था, लेकिन हादसे के 24 घंटे बाद भी फाटक नहीं खुल सका है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 12 सालों के इंतजार के बाद बना था ओवरब्रिज रोजाना हजारों लोग इसी मार्ग से छोटे-बड़े वाहनों और यात्री गाड़ियों के जरिए सफर करते हैं। करीब 12 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद जब यह ओवरब्रिज बनकर तैयार हुआ था तो लोगों को इटाढ़ी रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। पुल के स्लैब धंसने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे फाटक को स्थायी रूप से किया बंद 30 मई को ओवरब्रिज चालू होने के बाद इटाढ़ी रेलवे फाटक को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। अब पुल बंद होने के बावजूद फाटक नहीं खुलने से लोगों की परेशानी दोगुनी हो गई है। स्थिति यह है कि रेलवे ट्रैक के बीच वाहनों की आवाजाही के लिए लगाए गए रबर पैड को भी शनिवार को रेलवे द्वारा हटा दिया गया, जिससे फाटक खुलने की संभावनाएं और धुंधली हो गई हैं। आवागमन का पूरा दबाव अब पांडेयपट्टी रेलवे फाटक पर आ गया है, जहां जाम और भीषण भीड़ की समस्या बढ़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन राहत की बातें तो कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। बक्सरवासियों का दर्द अब साफ तौर पर छलकने लगा है। जिन लोगों ने ओवरब्रिज को वर्षों के संघर्ष के बाद राहत की राह माना था, वे आज खुद को फिर उसी पुराने संकट के बीच खड़ा पा रहे हैं।
ROB धंसा, फाटक भी बंद: बक्सरवासियों की राह हुई मुश्किल:24 घंटे बाद भी रेलवे फाटक नहीं खुला; लोगों में आक्रोश
बक्सर-वरुणा रेल ओवरब्रिज (ROB) के इटाढ़ी रोड की ओर पांचवें पिलर के ऊपर स्लैब धंसने के बाद बक्सरवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को पहले भारी वाहनों और फिर छोटे वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई गई थी, जबकि शनिवार को पुल पर मिट्टी गिराकर सभी प्रकार के वाहनों के लिए मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया। दूसरी ओर जिला प्रशासन की ओर से इटाढ़ी रोड स्थित रेलवे फाटक को खोलकर लोगों को राहत देने का दावा किया जा रहा था, लेकिन हादसे के 24 घंटे बाद भी फाटक नहीं खुल सका है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 12 सालों के इंतजार के बाद बना था ओवरब्रिज रोजाना हजारों लोग इसी मार्ग से छोटे-बड़े वाहनों और यात्री गाड़ियों के जरिए सफर करते हैं। करीब 12 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद जब यह ओवरब्रिज बनकर तैयार हुआ था तो लोगों को इटाढ़ी रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। पुल के स्लैब धंसने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे फाटक को स्थायी रूप से किया बंद 30 मई को ओवरब्रिज चालू होने के बाद इटाढ़ी रेलवे फाटक को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। अब पुल बंद होने के बावजूद फाटक नहीं खुलने से लोगों की परेशानी दोगुनी हो गई है। स्थिति यह है कि रेलवे ट्रैक के बीच वाहनों की आवाजाही के लिए लगाए गए रबर पैड को भी शनिवार को रेलवे द्वारा हटा दिया गया, जिससे फाटक खुलने की संभावनाएं और धुंधली हो गई हैं। आवागमन का पूरा दबाव अब पांडेयपट्टी रेलवे फाटक पर आ गया है, जहां जाम और भीषण भीड़ की समस्या बढ़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन राहत की बातें तो कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। बक्सरवासियों का दर्द अब साफ तौर पर छलकने लगा है। जिन लोगों ने ओवरब्रिज को वर्षों के संघर्ष के बाद राहत की राह माना था, वे आज खुद को फिर उसी पुराने संकट के बीच खड़ा पा रहे हैं।
