Saturday, June 6, 2026

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दुबई-बैंकॉक में नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी:देहरादून के छात्र विदेश पहुंचे तो फर्जी निकले दस्तावेज, पुलिस से पहले कॉलेज ने किया रेस्क्यू


देहरादून के मां गंगे इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के 9 छात्रों का विदेश में नौकरी करने का सपना उस समय टूट गया जब उन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और झूठे वादों के आधार पर श्रीलंका, बैंकॉक, मलेशिया और दुबई भेज दिया गया। सभी छात्रों से कुल 52 लाख रुपए लिए गए लेकिन विदेश पहुंचने के बाद किसी को नौकरी नहीं मिली, कुछ छात्र डिपोर्ट कर दिए गए और कुछ कई दिनों तक होटलों में फंसे रहे। कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि छात्रों की परेशानी सामने आने पर उन्होंने प्रेमनगर थाने में शिकायत देने की कोशिश की, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद कॉलेज के वाइस प्रेसिडेंट खुशाल सिंह अधिकारी खुद विदेश पहुंचे और करीब 20 दिनों तक अलग-अलग देशों में रहकर छात्रों को सुरक्षित निकालने और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगे रहे। कॉलेज का कहना है कि विदेशों में फंसे सभी छात्रों को वापस लाने और कथित एजेंसी के नेटवर्क तक पहुंचने के बाद ही पुलिस ने एजेंसी संचालक पति-पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। दैनिक भास्कर ने कॉलेज प्रबंधन और छात्रों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम को समझा। मां गंगे इंस्टीट्यूट तक ऐसे पहुंची एजेंसी, यहीं से शुरू हुआ खेल देहरादून स्थित मां गंगे इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के अनुसार झारखंड की एक प्लेसमेंट एजेंसी ने उनसे संपर्क किया था। एजेंसी ने दावा किया कि वह दुबई, मलेशिया, श्रीलंका और अन्य देशों में होटल, क्रूज और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार दिला सकती है। कंपनी की ओर से जॉब ऑफर, रोजगार अनुबंध, वीजा और अन्य दस्तावेज भेजे गए, जो पहली नजर में सही दिखाई दिए। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि एजेंसी लंबे समय से संपर्क में थी और खुद को भरोसेमंद बताती रही। कंपनी का नाम, कार्यालय और ऑनलाइन जानकारी भी उपलब्ध थी। इसी भरोसे के आधार पर छात्रों को विदेश भेजा गया। एजेंसी ने दावा किया था कि रोजगार वीजा तैयार हैं और विदेश पहुंचने के बाद छात्रों को सीधे नौकरी मिल जाएगी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, इसलिए छात्रों और उनके परिवारों को भी किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। बैंकॉक में 22 दिन फंसे रहे; तब यकीन हुआ कि कुछ गड़बड़ है कॉलेज प्रबंधन के अनुसार सबसे पहले चार छात्रों को श्रीलंका भेजा गया। इनमें नैनीताल का एक छात्र भी शामिल था। छात्र ने बताया कि कंपनी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि सभी दस्तावेज सही हैं और एयरपोर्ट पर खुद को पर्यटक बताना है। लेकिन चेन्नई से श्रीलंका पहुंचने के बाद इमिग्रेशन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की और कागजात फर्जी पाए गए। चारों छात्रों को रोक लिया गया और करीब 12 घंटे एयरपोर्ट पर बैठाने के बाद उन्हें वापस बेंगलुरु डिपोर्ट कर दिया गया। छात्र का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि दस्तावेज गलत हैं। श्रीलंका की घटना के बाद एजेंसी ने अपनी गलती मानते हुए उन्हें दोबारा विदेश भेजने का भरोसा दिया। इसके बाद कुछ युवाओं को बैंकॉक भेजा गया, जहां उन्हें बताया गया कि जहाज पर जॉइनिंग में देरी हो रही है। छात्र के अनुसार वे करीब 22 दिनों तक होटल में रुके रहे और हर बार नई तारीख देकर इंतजार कराया जाता रहा। इसी दौरान मलेशिया में मौजूद युवाओं को भी लंबे समय तक होटल में रुकवाया गया। कई बार छात्रों के पास खाने तक के पैसे नहीं बचे और उन्हें घर से पैसे मंगाने पड़े। शुरुआत में उन्होंने परिवारों को पूरी जानकारी नहीं दी, लेकिन परेशानी बढ़ने पर सच्चाई बतानी पड़ी। अलग-अलग देशों से एक जैसी शिकायतें मिलने के बाद कॉलेज प्रबंधन को यकीन हो गया कि मामला सामान्य नहीं है। फर्जी बुकिंग मिलीं, फिर 25 बार थाने के चक्कर लगाए छात्रों की शिकायतों के बाद कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू की। वाइस प्रेसिडेंट खुशाल सिंह अधिकारी को छात्रों ने बताया कि जिन होटल बुकिंग और यात्रा व्यवस्थाओं की जानकारी उन्हें दी गई थी, उनमें कई गड़बड़ियां थीं। कुछ बुकिंग फर्जी निकलीं और जिन जॉब ऑफर तथा वीजा दस्तावेजों के आधार पर छात्रों को भेजा गया था, उनकी भी पुष्टि नहीं हो सकी। कॉलेज प्रबंधन का आरोप है कि विदेश में छात्रों के फंसने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल के अंत में प्रेमनगर थाने में शिकायत दी थी। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता बताने के बावजूद उन्हें पहले तथ्यों का सत्यापन करने और पुख्ता सबूतों के साथ दोबारा आने को कहा गया। इसके बाद शिकायत प्रेमनगर थाने से सीओ कार्यालय और फिर एसएसपी कार्यालय तक पहुंची, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। प्रबंधन का दावा है कि वे करीब 25 बार थाने और कई बार सीओ कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। पुलिस से पहले खुद विदेश पहुंचे VP, दुबई तक तलाशा नेटवर्क कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जब शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने खुद छात्रों को निकालने और पूरे मामले की तह तक पहुंचने का फैसला किया। वाइस प्रेसिडेंट खुशाल सिंह अधिकारी पहले श्रीलंका पहुंचे, फिर बैंकॉक और बाद में दुबई जाकर मामले की पड़ताल की। करीब 20 दिनों तक चले इस अभियान में उन्होंने छात्रों, स्थानीय संपर्कों और एजेंसी से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई। जांच के दौरान उन्हें ऐसे लोगों के बारे में पता चला जो छात्रों की विदेश यात्रा और ठहरने की व्यवस्था से जुड़े हुए थे। इन्हीं जानकारियों के आधार पर वे एजेंसी के कथित नेटवर्क तक पहुंचे। कॉलेज का दावा है कि इसी दौरान उन्हें पता चला कि प्लेसमेंट एजेंसी का संचालन दुबई में मौजूद एक व्यक्ति और भारत में मौजूद उसकी पत्नी मिलकर कर रहे थे। दोनों कथित तौर पर युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे पैसे लेते थे। 9 छात्रों का रेस्क्यू, नई नौकरी भी दिलाई; अब पुलिस जांच में जुटी कॉलेज प्रबंधन के अनुसार करीब 20 दिनों तक चले प्रयासों के बाद विदेशों में फंसे सभी छात्रों को सुरक्षित निकाल लिया गया। मलेशिया और बैंकॉक में मौजूद युवाओं को वापस भारत लाया गया, जबकि दुबई में मौजूद कुछ छात्रों को अन्य कंपनियों में रोजगार दिलाने की व्यवस्था की गई। कई युवाओं को नई नौकरी मिल चुकी है और बाकी के लिए भी प्रयास जारी हैं। हालांकि इस पूरी घटना का असर छात्रों की जिंदगी पर पड़ा। नैनीताल के छात्र का कहना है कि डिपोर्ट होने के कारण उसका पासपोर्ट जमा हो गया और भविष्य में कुछ देशों की यात्रा पर भी असर पड़ा। विदेश में नौकरी करने का सपना लेकर निकले युवाओं के तीन महीने बर्बाद हो गए और हजारों रुपये खर्च हो गए। अब पुलिस ने एजेंसी संचालक पति-पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो मामले की जांच और आरोपियों तक पहुंचने में और तेजी आ सकती थी। ————————— ये खबर भी पढ़ें…. 300 दिन कैद के आरोपों पर पति की सफाई:बोला- बीवी मेंटली बीमार थी, ये बात शादी के बाद बताई, टॉयलेट में बंद रखने वाली बात झूठी देहरादून में पत्नी को 10 महीने तक घर में कैद रखकर प्रताड़ित करने के आरोपों के बीच अब आरोपी पति राहुल खंडूरी सामने आए हैं। दिल्ली में सरकारी टीचर राहुल ने दैनिक भास्कर एप से बातचीत में दावा किया कि उनकी पत्नी लंबे समय से मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं और शादी से पहले ये बात उनसे छिपाई गई थी। (पढ़ें पूरी खबर)

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