Sunday, June 7, 2026

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नेत्रदान-अंगदान के लिए सड़कों पर उतरे हजारों लोग:पूर्णिया में 45 संगठनों ने दिखाई एकजुटता, झिझिया की थाप पर जागरूकता का संदेश


पूर्णिया में नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। दधीचि देहदान समिति की ओर से आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन के तहत निकाली गई ब्लाइंड वॉक में जिले भर के 45 सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संगठनों ने हिस्सा लिया। जागरूकता यात्रा को जीएमसीएच के अकादमिक भवन परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। जैसे ही रैली आगे बढ़ी, शहर का माहौल पूरी तरह बदल गया। हाथों में बैनर, तख्तियां और नेत्रदान-अंगदान के संदेश लिए सैकड़ों लोग एक साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। पूरे रास्ते लोगों को यह संदेश दिया गया कि मृत्यु के बाद भी किसी की आंखें किसी की दुनिया रोशन कर सकती हैं और अंगदान किसी को नया जीवन दे सकता है। आम जनता से खास अपील जागरूकता यात्रा का सबसे आकर्षक दृश्य किलकारी की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत झिझिया नृत्य रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी बालिकाएं लोक संस्कृति की झलक के साथ नेत्रदान और अंगदान का संदेश दे रही थीं। ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों की धुन पर झिझिया की प्रस्तुति ने राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर लोग रुककर इस अनूठी जागरूकता यात्रा को देखते रहे और कार्यक्रम की सराहना करते नजर आए। जीएमसीएच से शुरू हुई यह ब्लाइंड वॉक शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए लाइन बाजार स्थित मां पंचादेवी सभागार पहुंची, जहां यह एक विशाल सभा में तब्दील हो गई। सभा में नेत्रदान, अंगदान और देहदान के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई और लोगों से इस पुनीत कार्य में आगे आने की अपील की गई। अंगदान को मानवता के प्रति सबसे बड़ा योगदान बताया कार्यक्रम के दौरान उन परिवारों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने परिजनों के नेत्रदान या देहदान के माध्यम से मानव सेवा की मिसाल पेश की है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे परिवार समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नेत्रदान, अंगदान और देहदान केवल दान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सबसे बड़ा योगदान है। ऐसे अभियानों से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और अधिक लोग इस महादान के लिए आगे आएंगे। सम्मेलन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, भारत स्काउट एंड गाइड, स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं, चिकित्सकों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में संगठन के पदाधिकारियों ने कोसी और पूर्णिया प्रमंडल में जागरूकता अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में सामाजिक सरोकार, लोक संस्कृति और जनभागीदारी का अनूठा संगम देखने को मिला।

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