Monday, June 8, 2026

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गयाजी में ANMMC के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल:ओपीडी सेवा ठप, बिना इलाज के लौटे मरीज; बुनियादी सुविधाओं की मांग


गयाजी के अनुग्रह मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी रही। डॉक्टरों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ओपीडी सेवाएं ठप रहने के कारण सैकड़ों मरीजों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही वापस लौटना पड़ा। अस्पताल परिसर में सुबह से ही अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। गया सहित आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। कई मरीज दूर-दराज के गांवों से घंटों का सफर तय कर आए थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उन्हें निराशा हाथ लगी। ओपीडी सेवाएं बाधित होने से न तो उन्हें सलाह मिल सकी और न ही आवश्यक उपचार मिला। मरीजों ने जताई नाराजगी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मरीजों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बार-बार अस्पताल आना उनके लिए मुश्किल है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में सबसे अधिक नुकसान गरीब मरीजों को उठाना पड़ता है। जूनियर डॉक्टरों, जिनमें राकेश कुमार और अमित रौशन शामिल हैं। इन्होंने बताया कि वे लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में पर्याप्त एयर कंडीशनिंग व्यवस्था नहीं होने के कारण भीषण गर्मी में काम करना बेहद कठिन हो गया था। ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी गर्मी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा था। हॉस्टल उपलब्ध नहीं कराने का आरोप हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शन के बाद कुछ स्थानों पर एयर कंडीशनर की व्यवस्था की गई है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उनकी कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें अब भी अधूरी हैं। आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने हॉस्टल व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रथम वर्ष के कई छात्र-छात्राओं को अब तक हॉस्टल उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके कारण उन्हें निजी मकानों में रहकर पढ़ाई और प्रशिक्षण करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक और शैक्षणिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं। वहीं, पुराने हॉस्टल भवनों की स्थिति भी जर्जर बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि भवनों की मरम्मत और नए आवासीय परिसरों का निर्माण समय की मांग है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं। विरोध प्रदर्शन का असर केवल ओपीडी तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल की रजिस्ट्रेशन व्यवस्था भी प्रभावित हुई। शुरुआती घंटों में कुछ मरीजों का पंजीकरण किया गया, लेकिन बाद में प्रक्रिया बाधित हो गई। इससे मरीजों को जांच, परामर्श और अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं प्राप्त करने में कठिनाई हुई। कई मरीज घंटों तक काउंटर और विभागों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी।

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