झारखंड की राजनीति कमाल की है। यहाँ कभी सरकारें अंकगणित से बनती हैं, कभी रसायनशास्त्र से चलती हैं और कभी-कभी राज्यसभा चुनाव आते ही पूरा खेल दर्शनशास्त्र में बदल जाता है। प्रदेश भाजपा के नेता कल तक यह उद्घोष कर रहे थे कि “हमारा उम्मीदवार, हमारी जीत”। लेकिन, अब अचानक उनके सुर बदल गए हैं और वे कह रहे हैं कि “परिमल नाथवानी की जीत ही हमारी जीत है।” पहले पूरे मनोयोग से इन लोगों ने अपना उम्मीदवार देने और जीत पक्की होने की घोषणा की थी। अब अपना खोया हुआ आत्मविश्वास टटोलते हुए, वे पूर्व में दिए गए अपने ही बयानों का खंडन कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू से लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और अन्य बड़े नेता अब यह सफाई दे रहे हैं कि उनके पास संख्या बल नहीं था, इसलिए निर्दलीय परिमल नाथवानी को समर्थन दिया गया है। झारखंड भाजपा की स्थिति उस छात्र जैसी हो गई है, जिसने पूरे साल यह दावा किया कि परीक्षा की उसकी तैयारी पूरी है, वह परीक्षा देगा और टॉप भी करेगा। लेकिन, ऐन परीक्षा के समय वह कहने लगा कि ‘पड़ोसी के नंबर भी हमारे ही माने जाएँ।’ 4 जून से 7 जून तक क्या-क्या हुआ 4 जून : कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली से प्रणव झा को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे गठबंधन में खटास आई। 5 जून : हेमंत सोरेन ने अपने सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। दिन में अपने आवास पर गठबंधन के सभी मंत्रियों और विधायकों की आपात बैठक बुलाई। बैठक के बाद झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस ने बिना चर्चा के प्रत्याशी घोषित किया है, अब झामुमो दोनों सीटों पर लड़ेगा। 6 जून : कांग्रेस के पर्यवेक्षक रांची पहुँचे। मान-मनौव्वल के बाद झामुमो ने केवल बैजनाथ राम के नाम की घोषणा की। 7 जून : शाम को हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सभी मंत्रियों और विधायकों की बैठक हुई, जिसमें अंतिम सहमति बन गई। तारीखों से समझिए : 22 मई से 8 जून तक कैसे बदले भाजपा के सुर झामुमो के बैजनाथ राम व कांग्रेस के प्रणव झा नामांकन भरते हुए। साथ में मुख्यमंत्री सोरेन व अन्य नेता।
अब भाजपा का यू-टर्न… कह रहे हैं उनकी जीत, हमारी जीत 4 दिन की तकरार, 48 घंटे में डैमेज कंट्रोल… कल तक था ‘हमारा प्रत्याशी, हमारी जीत’ का दावा… कांग्रेस द्वारा एकतरफा प्रत्याशी घोषित करने के बाद झारखंड ‘इंडिया’ गठबंधन में पैदा हुआ विवाद आखिरकार सुलझ गया। गठबंधन में दरार की अटकलें तब तेज हो गईं, जब झामुमो ने कांग्रेस के फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई थी। विरोध दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सभी सरकारी कार्यक्रम तक स्थगित कर दिए थे। हालांकि, 48 घंटे की सघन सियासी कवायद, दिल्ली से भेजे गए कांग्रेस के दो पर्यवेक्षकों की दखल और कई दौर की बैठकों के बाद मुख्यमंत्री ने डैमेज कंट्रोल करते हुए गठबंधन की गांठ को सुलझा लिया। रविवार को हेमंत की मौजूदगी में झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा ने एक साथ नामांकन दाखिल किया। इस साझा नामांकन से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि फिलहाल इंडिया गठबंधन में ‘ऑल इज वेल’ है। हालांकि, अब असली चुनौती 18 जून को होने वाले मतदान की है। 29 मई : तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने हेमंत से भेंट की। कांग्रेस नेताओं ने आश्वासन दिया था कि उनका प्रत्याशी सीएम की पसंद का होगा। तय हुआ था कि हेमंत व कांग्रेस आलाकमान के बीच बातचीत के बाद प्रत्याशी का चेहरा सामने आएगा। 22 मई : राज्यसभा चुनाव की घोषणा के दिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने दावा किया कि इस चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी उतरेगी और जीत दर्ज करेगी। 25 मई : चुनाव समिति की बैठक के बाद अमर बाउरी ने दोहराया कि प्रत्याशी उतारा जाएगा। कोई बाहरी नहीं, बल्कि पार्टी का कार्यकर्ता ही चुनाव लड़ेगा। 31 मई : प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू दिल्ली रवाना हुए। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेताओं के साथ मंथन होगा और पार्टी हर हाल में अपना उम्मीदवार उतारेगी। 2 जून : दिल्ली से लौटने पर आदित्य साहू ने कहा- “कोई धनपशु नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ता ही हमारा राज्यसभा प्रत्याशी होगा। एक-दो दिन में नाम की घोषणा हो जाएगी।” 4 जून : प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि भाजपा मजबूती से चुनाव लड़ेगी और जीतेगी। मतदान के दिन स्पष्ट हो जाएगा कि कौन किसके साथ खड़ा है। 5 जून : भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने दावा किया कि पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारने का निर्णय ले लिया है और 6 जून की सुबह तक घोषणा हो जाएगी। 6 से 7 जून : प्रत्याशी उतारने के सवाल पर भाजपा के हर नेता मौन हो गए। 8 जून : प्रदेश अध्यक्ष ने यू-टर्न लेते हुए निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा कर दी। इससे अटकलों पर विराम लग गया। दिल्ली दरबार को नहीं मिला ‘उपयुक्त उम्मीदवार’ उल्लेखनीय है कि प्रदेश चुनाव समिति ने राज्यसभा चुनाव के लिए थोक भाव में नामों का चयन कर सूची दिल्ली दरबार को भेजी थी। दिल्ली ने सूची देखी, नाम देखे, समीकरणों का गुणा-भाग किया और अंत में यह निष्कर्ष निकाला कि “उपयुक्त उम्मीदवार’ नामक प्राणी इस सूची से फिलहाल विलुप्त है। वहीं भाजपा के गौरव वल्लभ ने भी चार दिन तक रांची में कैंप किया, पर पार्टी की ओर से उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

