बक्सर जिले में एक विवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। मृतका के परिजनों द्वारा दहेज हत्या का आरोप लगाए जाने के बाद अब सामाजिक संगठन भी न्याय की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में महिला विकास मंच की प्रदेश अध्यक्ष मीना वानवी बक्सर पहुंचीं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मृतका श्यामा पांडेय के पिता कन्हैया पांडेय ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की शादी 4 दिसंबर 2025 को राहुल कुमार चौबे से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद से ही उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। ”आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज के लिए की गई सुनियोजित हत्या” परिजनों के अनुसार, 31 जनवरी 2026 की रात श्यामा ने अपने भाई को फोन कर प्रताड़ना की जानकारी दी थी। इसके अगले ही दिन, 1 फरवरी 2026 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज के लिए की गई सुनियोजित हत्या है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने में भी देरी हुई और बाद में मिली रिपोर्ट में उन तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था जिनकी जानकारी पहले ही जांच एजेंसियों को दी गई थी। संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया उनका कहना है कि मेडिकल और अल्ट्रासाउंड जांच में मृतका के गर्भवती होने की बात सामने आई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण पहलू का समुचित उल्लेख नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, महिला आयोग की एक टीम भी बक्सर पहुंची। टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार, जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की धीमी गति को लेकर आयोग की सदस्य नाराज दिखीं और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी इसी बीच महिला विकास मंच की प्रदेश अध्यक्ष मीना वानवी सदर अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्होंने मामले से संबंधित जानकारी लेने और अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने पर सिविल सर्जन मौजूद नहीं थे। इसके बाद वे जिला पदाधिकारी कार्यालय भी गईं, लेकिन वहां भी संबंधित अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। मीना वानवी ने कहा कि बक्सर की बेटी को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही है और पीड़ित परिवार को लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। महिला विकास मंच ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार, महिला आयोग और सामाजिक संगठनों की बढ़ती सक्रियता के बीच अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के अगले चरण पर टिकी हैं कि आखिर श्यामा पांडेय को न्याय कब तक मिल पाता है।
बक्सर पहुंचीं महिला विकास मंच की प्रदेश अध्यक्ष:दहेज हत्या मामले में प्रशासन की काम करने के तरीके पर सवाल
बक्सर जिले में एक विवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। मृतका के परिजनों द्वारा दहेज हत्या का आरोप लगाए जाने के बाद अब सामाजिक संगठन भी न्याय की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में महिला विकास मंच की प्रदेश अध्यक्ष मीना वानवी बक्सर पहुंचीं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मृतका श्यामा पांडेय के पिता कन्हैया पांडेय ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की शादी 4 दिसंबर 2025 को राहुल कुमार चौबे से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद से ही उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। ”आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज के लिए की गई सुनियोजित हत्या” परिजनों के अनुसार, 31 जनवरी 2026 की रात श्यामा ने अपने भाई को फोन कर प्रताड़ना की जानकारी दी थी। इसके अगले ही दिन, 1 फरवरी 2026 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज के लिए की गई सुनियोजित हत्या है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने में भी देरी हुई और बाद में मिली रिपोर्ट में उन तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था जिनकी जानकारी पहले ही जांच एजेंसियों को दी गई थी। संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया उनका कहना है कि मेडिकल और अल्ट्रासाउंड जांच में मृतका के गर्भवती होने की बात सामने आई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण पहलू का समुचित उल्लेख नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, महिला आयोग की एक टीम भी बक्सर पहुंची। टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार, जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की धीमी गति को लेकर आयोग की सदस्य नाराज दिखीं और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी इसी बीच महिला विकास मंच की प्रदेश अध्यक्ष मीना वानवी सदर अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्होंने मामले से संबंधित जानकारी लेने और अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने पर सिविल सर्जन मौजूद नहीं थे। इसके बाद वे जिला पदाधिकारी कार्यालय भी गईं, लेकिन वहां भी संबंधित अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। मीना वानवी ने कहा कि बक्सर की बेटी को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही है और पीड़ित परिवार को लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। महिला विकास मंच ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार, महिला आयोग और सामाजिक संगठनों की बढ़ती सक्रियता के बीच अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के अगले चरण पर टिकी हैं कि आखिर श्यामा पांडेय को न्याय कब तक मिल पाता है।

