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हरमू नदी में गिर रहे 76 नालों के गंदा पानी को रोकने के उपाय नहीं, गाद साफ करने 2 करोड़ की ड्रेन मास्टर उतारी

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  • No Measures Have Been Taken To Stop The Dirty Water From 76 Drains Flowing Into The Harmu River; A Drain Master Worth Rs 2 Crore Has Been Deployed To Clean The Silt.

रांची4 घंटे पहले

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हरमू नदी की सफाई में लगी मशीन। - Dainik Bhaskar

हरमू नदी की सफाई में लगी मशीन।

भास्कर इनसाइट

शहर से गुजर रही हरमू नदी की सफाई के लिए रांची नगर निगम ने ड्रेन मास्टर क्लीनिंग मशीन को उतारा है। बुधवार को मेयर रोशनी खलखो और डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने हरमू नदी में अत्याधुनिक ड्रेन मास्टर क्लीनिंग मशीन का विधिवत उद्घाटन किया। इसके साथ ही नदी की सफाई का अभियान भी शुरू हो गया।

करीब 2 करोड़ की लागत वाली यह मशीन पानी में तैरते हुए नदी के भीतर जमा कचरा, जलकुंभी और गाद को निकालने का काम करेगी। इस मशीन की खरीदारी सीसीएल के सीएसआर फंड से की गई है। अब इस मशीन से हरमू नदी में जमा कचरा और गाद को निकाला जाएगा।

इस मौके पर मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि हरमू नदी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाना नगर निगम की प्राथमिकता है। वहीं डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने उम्मीद जताई कि आधुनिक मशीन के उपयोग से नदी के सफाई अभियान को नई गति मिलेगी और शहरवासियों को एक स्वच्छ जलधारा देखने को मिलेगी। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि हरमू नदी में जमा कचरा और गाद तो साफ हो जाएगा। नदी में गिर रहे 76 नालों के गंदे पानी और कचरे की सफाई कैसे होगी। क्योंकि, नगर निगम या नगर विकास विभाग की ओर से नालों के गंदे पानी को रोकने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में एक ओर ड्रेन मास्टर मशीन से नदी की सफाई होगी और दूसरी ओर 76 नालों का कचरा नदी को गंदा करता करता रहेगा।

85 करोड़ रु. फूंके, नाला बनकर रह गई हरमू नदी

हरमू नदी के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने 85 करोड़ रुपए फूंक दिया है। लगभग एक दशक पहले निर्माण शुरू हुआ। पांच साल पहले काम पूरा हो गया। लेकिन नदी में गिरने वाले 82 में मात्र 6 नालों के गंदे पानी को ही साफ करने की योजना बनी। 76 नालों को खुला ही छोड़ दिया गया। ऑपरेशन और मेंटनेंस भी बंद हो गया। क्योंकि, नदी के ऑपरेशन और मेंटनेंस के लिए जुडको ने कांट्रेक्टर को बकाया पैसा नहीं दिया। इस वजह से हरमू अब नाला बनकर रह गई। ऐसे में ड्रेन मशीन के डीजल और अन्य संसाधनों पर लाखों खर्च करने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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