बेगूसराय सदर। जिले में पिछले कई दिनों से बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण ईंट भट्ठा उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। सदर प्रखंड के चांदपूरा, परना, नीमा बारेठ और तरैया सहित आसपास के क्षेत्रों में खुले में सूखने के लिए रखी लाखों कच्ची ईंटें बारिश में गलकर नष्ट हो गईं। इससे भट्ठा संचालकों को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। भट्ठा संचालक मुन्ना कुमार, देवानंद कुमार, विकास कुमार और कपूरी कुमार ने बताया कि नवंबर से जून तक का समय ईंट निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में बड़ी मात्रा में कच्ची ईंटें तैयार कर उन्हें धूप में सुखाया जाता है। हालांकि, अचानक बदले मौसम और लगातार बारिश ने उत्पादन कार्य को पूरी तरह बाधित कर दिया है। कई भट्ठों पर तैयार कच्ची ईंटों के बड़े-बड़े ढेर मिट्टी में बदल गए हैं। संचालकों के अनुसार, एक हजार कच्ची ईंटों के निर्माण पर लगभग 2500 रुपये की लागत आती है। लगातार बारिश के कारण प्रत्येक भट्ठे को अनुमानित 5 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक का नुकसान हुआ है। इस क्षति में कच्ची ईंटों के नष्ट होने के साथ-साथ मजदूरी, परिवहन और उत्पादन में लगाए गए निवेश की लागत भी शामिल है। उत्पादन कार्य ठप होने से भट्ठों पर कार्यरत मजदूरों, ट्रैक्टर चालकों, ड्राइवरों और अन्य संबंधित कर्मियों के समक्ष रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अब उत्पादन दोबारा शुरू करने के लिए मिट्टी तैयार करने से लेकर ईंट निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया फिर से करनी होगी, जिससे कुल लागत में और वृद्धि होगी। भट्ठा संचालकों ने आशंका जताई है कि यदि मौसम की यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पक्की ईंटों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल, कई भट्ठों पर निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। बेमौसम बारिश ने ईंट उद्योग से जुड़े लोगों की चिंताएं और आर्थिक परेशानियां काफी बढ़ा दी हैं।
बेगूसराय में लगातार बारिश से ईंट भट्ठों को भारी नुकसान:लाखों कच्ची ईंटें गलकर नष्ट हुईं, संचालकों को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति
बेगूसराय सदर। जिले में पिछले कई दिनों से बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण ईंट भट्ठा उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। सदर प्रखंड के चांदपूरा, परना, नीमा बारेठ और तरैया सहित आसपास के क्षेत्रों में खुले में सूखने के लिए रखी लाखों कच्ची ईंटें बारिश में गलकर नष्ट हो गईं। इससे भट्ठा संचालकों को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। भट्ठा संचालक मुन्ना कुमार, देवानंद कुमार, विकास कुमार और कपूरी कुमार ने बताया कि नवंबर से जून तक का समय ईंट निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में बड़ी मात्रा में कच्ची ईंटें तैयार कर उन्हें धूप में सुखाया जाता है। हालांकि, अचानक बदले मौसम और लगातार बारिश ने उत्पादन कार्य को पूरी तरह बाधित कर दिया है। कई भट्ठों पर तैयार कच्ची ईंटों के बड़े-बड़े ढेर मिट्टी में बदल गए हैं। संचालकों के अनुसार, एक हजार कच्ची ईंटों के निर्माण पर लगभग 2500 रुपये की लागत आती है। लगातार बारिश के कारण प्रत्येक भट्ठे को अनुमानित 5 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक का नुकसान हुआ है। इस क्षति में कच्ची ईंटों के नष्ट होने के साथ-साथ मजदूरी, परिवहन और उत्पादन में लगाए गए निवेश की लागत भी शामिल है। उत्पादन कार्य ठप होने से भट्ठों पर कार्यरत मजदूरों, ट्रैक्टर चालकों, ड्राइवरों और अन्य संबंधित कर्मियों के समक्ष रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अब उत्पादन दोबारा शुरू करने के लिए मिट्टी तैयार करने से लेकर ईंट निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया फिर से करनी होगी, जिससे कुल लागत में और वृद्धि होगी। भट्ठा संचालकों ने आशंका जताई है कि यदि मौसम की यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पक्की ईंटों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल, कई भट्ठों पर निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। बेमौसम बारिश ने ईंट उद्योग से जुड़े लोगों की चिंताएं और आर्थिक परेशानियां काफी बढ़ा दी हैं।


