रांची17 घंटे पहले
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रिम्स: मेडॉल को ₹38.20 करोड़ के भुगतान पर एजी की गंभीर आपत्ति
राँची स्थित रिम्स (RIMS) में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित डायग्नोस्टिक सेवाओं के लिए निजी एजेंसी मेडॉल (Medall) को किए गए 38.20 करोड़ रुपए के भुगतान पर प्रधान महालेखाकार (AG) ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में मुख्य आपत्तियां:
फर्जी बिलों पर भुगतान: ऑडिट टीम ने फर्जी बिलों की पुष्टि होने के बावजूद 6.05 करोड़ रुपए का भुगतान किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है।
इन बिंदुओं पर मांगा जवाब: एजी कार्यालय ने बिजली शुल्क की वसूली, टीडीएस (TDS) कटौती और रिकॉर्ड सत्यापन को लेकर रिम्स प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है।
अनियमित घोषित होने का खतरा: एजी ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो इस पूरे भुगतान को पूरी तरह अनियमित माना जा सकता है।
दो दिनों की समयसीमा: 26 मई को जारी ऑडिट इंक्वायरी में रिम्स को महज दो कार्यदिवस के भीतर जवाब देने को कहा गया था।
एजी का सवाल: महालेखाकार ने पूछा है कि मेडॉल एजेंसी ने रिम्स में कब से कब तक सेवाएं दीं और क्या वह वर्तमान में भी सेवा दे रही है? यदि सेवा बंद हो चुकी है, तो इसके क्या कारण हैं? ऑडिट टीम वर्ष 2019 की संचिका और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है।

कब-कब और कितना हुआ भुगतान?
ऑडिट टीम वर्ष 2017 से 2020 के बीच हुए भुगतानों की बारीकी से जांच कर रही है, जिससे तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। भुगतान का विवरण इस प्रकार है:
| अवधि / तिथि | भुगतान राशि |
| जुलाई 2017 | 1.45 करोड़ रुपए |
| अगस्त – अक्टूबर 2017 | 3.52 करोड़ रुपए |
| नवंबर 2017 – जनवरी 2018 | 3.04 करोड़ रुपए |
| फरवरी 2018 | 98.35 लाख रुपए |
| मार्च 2018 – जुलाई 2019 | 14.80 करोड़ रुपए |
| मार्च 2018 – जुलाई 2019 (अन्य) | 8.31 करोड़ रुपए |
| अप्रैल 2019 – मार्च 2020 | 7.73 करोड़ रुपए |
| 16 नवंबर 2020 | 6.05 करोड़ रुपए |

