अररिया में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नियमावली के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले में प्रत्येक रविवार को कचरे को चार श्रेणियों – जैविक, सूखा, सैनिटरी और विशेष अपशिष्ट – में अनिवार्य रूप से अलग किया जाएगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि गलियों, नालियों और जल निकायों में कचरा फेंकने तथा खुले में कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
ऐसे कृत्यों को दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसके लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।


नियमित भुगतान सुनिश्चित करने पर भी बल
गीले अपशिष्ट के ऑन-साइट प्रसंस्करण पर विशेष जोर दिया गया। पंचायतों को जैविक कचरे से खाद बनाने के लिए विकेंद्रीकृत प्रणालियाँ विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया। नागरिकों से अपशिष्ट संग्रहण और प्रबंधन सेवाओं के लिए निर्धारित मासिक शुल्क का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
जिलाधिकारी ने गांवों में संस्थानों, बाजारों और बड़े आयोजन स्थलों को ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (BWG) के रूप में चिह्नित करने और उनके कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया। वार्ड सदस्यों और मुखियाओं को अपशिष्ट पृथक्करण अभियान में प्रमुख सूत्रधार की भूमिका निभाने और लोगों को जागरूक करने के लिए कहा गया।
क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से होगा
बैठक में बताया गया कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-23 के तहत जिलाधिकारी को विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले BWG के खिलाफ जलापूर्ति और विद्युत आपूर्ति विच्छेद सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। ग्राम पंचायतों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से होगा।
20 हजार या अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों के लिए 18 माह, 10 से 20 हजार जनसंख्या वाली पंचायतों के लिए 24 माह और 10 हजार से कम जनसंख्या वाली पंचायतों के लिए 36 माह की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी विभाग समन्वित प्रयास से नियमावली का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

