बेगूसराय में सोमवार को सीटू (CITU), बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन और बिहार राज्य किसान सभा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जेल भरो अभियान किया गया। इस दौरान करीब 100 कार्यकर्ता ट्रैफिक चौक के पास से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह और जिला पार्षद अंजनी कुम
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जहां पहले से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और गेट बंद कर दिए गए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। इसके बाद सभी को हिरासत में लेकर नगर थाना लाया गया। यहां कागजी प्रक्रिया पूरी कर फिर सभी को रिहा कर दिया गया।
लेबर कोड रद्द करने और मजदूर-किसानों की मांगें उठाई। मौके पर सीपीएम के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्तर पर जेल भरो आंदोलन है।

समाहरणालय पर प्रदर्शन करते नेता।
राष्ट्रीय आंदोलन के मुद्दे आज भी बरकरार हैं
कहा कि आंदोलन महत्वपूर्ण इसलिए है कि राष्ट्रीय आंदोलन के जो मुद्दे थे, आज भी बरकरार हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार संविधान-जनवादी अधिकार को समाप्त करना चाहती है। अंग्रेजों से भी काला कानून बनाकर तमाम चीजों पर हमले हो रहे हैं। अंग्रेजों ने जैसे रॉलेट एक्ट लाकर हड़ताल पर प्रतिबंध लगाया था, आज वही सब कुछ नरेंद्र मोदी की सरकार कर रही है।
नौकरी देने के बदले छीना जा रहा है, रेलवे और हवाई अड्डा सब का निजीकरण किया जा रहा है। विश्वविद्यालय जिसे चाहे उसे खोलने का अधिकार दे दिया गया है। बिहार के मुख्यमंत्री कहते हैं कि पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खुलेंगे। आखिर यह सब क्या हो रहा है। कॉलेज-यूनिवर्सिटी सब कुछ कॉरपोरेट और विदेशी के हाथ में दिया जा रहा है।

सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी।
मनरेगा की वापसी हो
अंजनी सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता खेती-किसानी के खिलाफ है, उसे रद्द किया जाए। 4 लेबर कोड श्रम कानून की हत्या कर बनाई गई है, उसे वापस करना होगा।
ओल्ड पेंशन और न्यूनतम मजदूरी पर हमला बंद हो, कृषि कानून पर हमला बंद हो। हमारा देश मजदूर किसानों की एकता का देश है। मनरेगा कानून ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवंत कानून था, उस कानून की हत्या करके नया कानून लाया गया है, इसे रद्द कर मनरेगा कानून की वापसी हो। 700 रुपया न्यूनतम मजदूरी होना चाहिए। कानून व्यवस्था ध्वस्त है, अपराधियों का बोल वाला चरम पर है।
