
भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट :
विक्रमशिला सेतु के कुछ भाग के गंगा में समाने के बाद इस पुल के बनने के पहले जो स्थिति थी वह स्थिति सोमवार को देखने काे मिला. पुल बनने के पहले जिन लोगों ने बरारी से गंगा पार किस तरह से जाते थे, कई लोगों को वह दिन याद आ गया. 2001 में इस पुल को चालू किया गया. इसके पहले बरारी से स्टीमर सेवा चलती थी.35 साल पहले भागलपुर से महादेवपुर घाट तक चलती थी रेलवे की स्टीमर सेवा
35 साल पहले जब विक्रमशिला सेतु नहीं बना था, तब भागलपुर के बरारी से महादेवपुर घाट तक रेलवे की स्टीमर सेवा चलती थी. उस समय महादेवपुर घाट से थाना बिहपुर स्टेशन तक छोटी लाइन थी. बिहपुर स्टेशन से ट्रेन से महादेवपुर घाट तक यात्री आते थे तब यात्री स्टीमर से बरारी आते थे, उसके बाद बरारी से भागलपुर स्टेशन तक छोटी लाइन ट्रेन सेवा से यात्री भागलपुर स्टेशन जाते थे. जब रेलवे ने यह सेवा बंद की तो भग्गू सिंह ने स्टीमर सेवा शुरू की. यह सेवा कई साल तक बंद की. जब विक्रमशिला सेतु का निर्माण शुरू हुआ, तो यह स्टीमर सेवा बंद की गयी.
लोगों ने कहा- रेलवे की स्टीमर सेवा व भग्गू सिंह की फेरी सेवा की याद ताजा हो गयी
प्रभात खबर ने पुल के कुछ हिस्से के टूट कर गंगा में समा जाने के बाद की स्थिति के बारे में बरारी के कुछ लोगों से बात की तो आज की स्थिति व पहले की स्थिति के बारे बात की.
बोले लोग :
जब विक्रमशिला सेतु नहीं था तो हमको महादेवपुर घाट जाना होता था तो पहले रेलवे द्वारा बरारी से स्टीमर सेवा थी. उससे हम महादेवपुर घाट जाते थे. उसके बाद वहां से अन्य जगहों के लिए जाते थे. आज वह स्थिति फिर से याद आ गयी. जल्द से जल्द टूटा हिस्सा बन जाये और लोगों की परेशानी दूर हो. –
जय प्रकाश सिंह, बरारी निवासी
सरकार जल्द से जल्द टूटे हिस्से को बनवा कर पुल को फिर से चालू करे. पुल बनने के पहले रेलवे की स्टीमर सेवा व भग्गू सिंह की फेरी सेवा से गंगा पार जाते थे. आज नाव के परिचालन को देखकर फिर पहले का दिन याद आ गया. –मदन राय, बरारी निवासी
– पुल घाट से नाव सेवा चालू होने से तीस साल पहले की याद ताजा हो गयी. पहले हमलोग बरारी घाट व लंच घाट से स्टीमर सेवा से गंगा पार महादेवपुर घाट तक जाते थे. वहां से छोटी लाइन रेल सेवा से थाना बिहपुर तक जाते थे. –
सुनील सिंह. बरारी निवासी
– विक्रमशिला सेतु का कुछ भाग जो गिर गया है, उसे सरकार जल्द से जल्द बनाये. पुल बनने के पहले हम भी नाव, स्टीमर से गंगा पार जाते थे. यह कई सालों तक चला. आज पुल की यह स्थिति के बाद नाव की सेवा जो चालू चालू हुई है उससे पुराने दिनों की याद आ गयी. –कैफी, जुबैर, बरहपुरा निवासी.B
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