पटना9 घंटे पहले
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए।
बिहार सरकार राज्य की हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां मुंडेश्वरी मंदिर, बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप सहित कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का वैज्ञानिक सर्वे, संरक्षण, उत्खनन और पर्यटन के रूप में समग्र विकास करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का लक्ष्य इन ऐतिहासिक धरोहरों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे बिहार की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो और पर्यटन को नई गति मिले।
मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर का होगा वैज्ञानिक पुनर्स्थापन
मुख्यमंत्री से देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर कैमूर जिले के मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर का विस्तृत सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों ने बताया कि मंदिर के आसपास हजारों प्राचीन भग्नावशेष बिखरे हुए हैं, जिन्हें वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और पुनर्स्थापित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर चरणबद्ध योजना तैयार कर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र का संरक्षण किया जाए। साथ ही पूरे इलाके को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
कैमूर बनेगा नया हेरिटेज और इको-टूरिज्म सर्किट
बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ और अन्य प्राकृतिक व प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों को जोड़कर एक हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म सर्किट विकसित करने पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि ये सभी स्थल बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे भविष्य में यहां पर्यटकों की पहुंच आसान होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह क्षेत्र देश का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है। भविष्य में इन स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का भी प्रयास किया जाएगा।
LiDAR और GPR तकनीक से होगा बोधगया का सर्वे
मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का अत्याधुनिक LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) और GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) तकनीक से सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।
इन तकनीकों की मदद से बिना खुदाई किए जमीन के अंदर मौजूद संभावित पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों की पहचान की जा सकेगी। इससे भविष्य में होने वाला उत्खनन अधिक सटीक और वैज्ञानिक होगा।
सुल्तानगंज और मंदार के संरक्षण पर भी रहेगा विशेष फोकस
बैठक में सुल्तानगंज और मंदार के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थलों के संरक्षण, विकास और बेहतर प्रस्तुतीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और अधिक से अधिक पर्यटक यहां पहुंचें।
केसरिया स्तूप का होगा शेष हिस्से का वैज्ञानिक उत्खनन
मुख्यमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष हिस्से का वैज्ञानिक उत्खनन कराने का निर्देश भी दिया। अभी तक इस विशाल स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन हुआ है, जबकि इसके बड़े हिस्से में महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष क्षेत्र का जल्द वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन और संरक्षण किया जाए ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर का पूरा स्वरूप दुनिया के सामने आ सके।
पर्यटन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की धरती के नीचे आज भी कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें सुरक्षित हैं। अगर उनकी वैज्ञानिक पहचान, संरक्षण और विकास किया जाए तो राज्य के इतिहास के नए तथ्य सामने आएंगे। इसके साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।


