Thursday, April 23, 2026

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Bihar IAS Son Yeshasvi Rajvardhan Secures UPSC Rank 11

बिहार कैडर के IAS के बेटे ने UPSC क्वालीफाई किया है पटना के यशस्वी राजवर्धन को 11वां रैंक हासिल हुआ है। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पटना से की और उसके बाद दिल्ली चले गए थे।

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यशस्वी राजवर्धन ने कहा कि मुझे काफी खुशी हो रही है। बचपन से ही यह मेरा सपना रहा है जो आज पूरा हुआ है। रिजल्ट आने का जब मुझे पता चला तो मैंने ऑनलाइन सर्च किया।

पहली बार देखने पर मुझे यकीन नहीं हुआ था फिर मैंने दोबारा चेक किया, तब जाकर यकीन हुआ। यशस्वी ने बताया कि उनके पिता रजनीश कुमार खुद बिहार कैडर में आईएएस ऑफिसर है।

अभी वह एक्साइस डिपार्टमेंट में कार्यरत है। उन्हें ही देखकर यशस्वी को इस फील्ड में आने का इंस्पिरेशन मिला।

बेटे ने पिता से आशीर्वाद लिया।

बेटे ने पिता से आशीर्वाद लिया।

प्राइवेट जॉब छोड़कर यूपीएससी के प्रिपरेशन में लगे

यशस्वी ने बताया कि इससे पहले वह एक प्राइवेट बैंक में जॉब कर रहे थे। उस दौरान यूपीएससी का एग्जाम दिया था मगर क्वालीफाई नहीं कर पाए। फिर उन्होंने जाॅब छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का सोचा।

सितंबर 2024 में उन्होंने जॉब छोड़ दिया और जून 2025 में प्रीलिम्स का एग्जाम दिया, जिसमें वह क्वालीफाई कर गए। उन्होंने प्रॉपर दो साल मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने कहा कि मेरा कंप्यूटर साइंस का बैकग्राउंड है और मैंने डाटा एनालिटिक्स में काफी काम किया है। मैं चाहता हूं कि उस एक्सपीरियंस को मैं इस फील्ड में भी यूटिलाइज करूं।

अपने पिता को यशस्वी मानते हैं इंस्पिरेशन

वह हमेशा अपने पिता को दूसरों की मदद करते हुए देखकर इंस्पायर्ड महसूस करते थे। उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने हमेशा मुझे एक अच्छा इंसान बनने की सलाह दी। इस नौकरी को लेकर उन्होंने हमेशा मुझे समझाया कि सिविल सर्विस में एक डायवर्स अपॉर्चुनिटी मिलती है और दूसरों की सेवा करने का जो संतोष इसमें है वह और कहीं नहीं। इसलिए उन्होंने मुझे एक बार यूपीएससी में प्रयास करने को कहा और फिर जब मुझे सफलता मिली तो उनकी खुशी दुगनी हो गई। इस नौकरी के माध्यम से मैं निचले तबके के लोगों की मदद करना चाहूंगा।

IAS पिता ने बेटे यशस्वी को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।

IAS पिता ने बेटे यशस्वी को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।

पिता ने कहा- अब बेटे के नाम से जाना जाऊंगा

यशस्वी के पिता रजनीश कुमार ने कहा कि यह मेरे लिए गौरव का पल है कि मेरा बेटा मेरी सर्विस में आया है। आज तक मैंने उसे नाम और पहचान दिया और आज मुझे उसके नाम से जाना जा रहा है। यह मेरे लिए एक भावुक पल है। मैं उसे साधारण जीवन जीने की ही राय दूंगा।

इसके साथ ही गरीब और निचले तबके के लोगों को लेकर संवेदनशील रहे और सरकार की नीतियों को लागू करने के दौरान उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। निर्भीक होकर ईमानदारी के साथ सतत सेवा में लगे रहे।

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