रांची6 घंटे पहले
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झारखंड की सड़कों पर सफर हर दिन के साथ और खतरनाक होता जा रहा है। राज्य में सड़क हादसों के सबसे संवेदनशील केंद्र यानी ब्लैक स्पॉट्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 15 जिलों में ब्लैक स्पॉट्स की संख्या 93 से बढ़कर अब 102 पर पहुंच गई है।
यानी सड़कों पर मौत के 9 नए ठिकाने और बढ़ गए हैं। सिर्फ रांची में ही ऐसे 22 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इस बढ़ती संख्या के बाद अब सड़क सुरक्षा कोषांग वाहनों की ओवर स्पीड पर लगाम कसने के लिए 24 नए हाइटेक इंटरसेप्टर वाहन खरीदने की तैयारी में है। एक इंटरसेप्टर वाहन पर करीब 24 लाख रुपए खर्च होंगे।
राज्य सरकार ने इससे पहले भी रफ्तार की वजह से होने वाले हादसे रोकने के लिए छह हाइटेक इंटरसेप्टर वाहन खरीदे थे। नियमों के मुताबिक इन्हें नेशनल हाइवे और घाटियों में तैनात किया जाना चाहिए था। लेकिन इनमें से दो वाहन रांची, दो धनबाद और दो जमशेदपुर में हैं।
क्या होता है ब्लैक स्पॉट… ब्लैक स्पॉट सड़क का वह 500 मीटर से 1 किमी तक का हिस्सा होता है, जहां 3 साल के दौरान कम से कम 5 गंभीर सड़क हादसे हुए हों या फिर 10 से अधिक लोगों की असमय जान गई हो।
राज्य में बढ़ गए दुर्घटनाओं के डेंजर जोन
गिरिडीह… धनबाद को जोड़ने वाले गिरिडीह-टुंडी रोड पर स्थित बड़कीटांड और पंडरी को हाल ही में आधिकारिक तौर पर ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। इसके अलावा, जीटी रोड पर बगोदर के पास स्थित बेको मोड़ नेशनल हाइवे पर चलने वाले वाहनों की अत्यधिक गति के कारण होने वाले भीषण हादसों का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
हजारीबाग… यूपी मोड़ अपनी तीखी ढलान और जानलेवा अंधे मोड़ की वजह से सबसे खतरनाक माना जाता है। इसके अतिरिक्त, मसीपिढ़ी चौक वाहनों की अनियंत्रित गति के कारण बड़ा दुर्घटना केंद्र बन चुका है। डेमोटांड़ और मोरांगी क्षेत्र में तेज रफ्तार व अचानक आने वाले टर्निंग पॉइंट की वजह से हमेशा हादसों की आशंका बनी रहती है।
रांची… राज्य में सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट रांची और इसके आसपास के इलाकों में है। चुटूपालू घाटी अपने तीखे मोड़ और ढलान के कारण अनियंत्रित हादसों का मुख्य केंद्र बनी हुई है। वहीं तैमारा घाटी अपनी ढलान और अंधाधुंध मोड़ों की वजह से बेहद संवेदनशील है। इसके अलावा, पिठौरिया घाटी में तीखी ढलान और असुरक्षित कट हादसों को आमंत्रण देते हैं। रातू से बीजूपाड़ा मार्ग पर मांडर और चान्हो के पास कई खतरनाक टर्निंग पॉइंट हैं। शहर के भीतर कांटाटोली चौक, करमटोली और सिरमटोली चौक को डेंजर जोन माना गया है।



